मंडलायुक्त के राम मोहन राव एक बार फिर बिना लाव लश्कर के जमीनी हकीकत से
रूबरू होने के लिए महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में पहुंच गए। उन्हें
ओपीडी में नेत्र विभाग के चिकित्सक नदारद मिले। जूनियर डॉक्टरों ने बताया
कि चिकित्सक क्लास लेने के लिए गए हुए हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने
एक समय में दो कार्यों में ड्यूटी लगाए जाने से इंकार किया है। कमिश्नर ने
इसके अलावा भी कई विभागों का निरीक्षण किया। शनिवार दोपहर करीब बारह बजे
कमिश्नर के राम मोहन राव मेडिकल कॉलेज गेट के पास अपनी गाड़ी खड़ी करवा कर
पैदल ही पर्चा बनवाने को निकल पड़े। उन्होंने लाइन में खड़े होकर नेत्र,
अस्थि एवं मानसिक रोग का पर्चा बनवाया। इसके बाद उन्होंने डेंटल विभाग की
ओर रुख किया। वहां पहुंचने पर दरवाजा बंद मिला। फिर वह एक्सरे कक्ष में
पहुंचे। वहां एक्सरे कराने का शुल्क पूछने पर कर्मचारी ने 44 रुपये बताए।
कमिश्नर ने फ्री में एक्सरे कराने को लेकर सवाल किया तो कर्मचारी ने मुख्य
चिकित्सा अधीक्षक डा. हरीशचंद्र आर्या से लिखवा कर लाने की सलाह दी। इसके
बाद वह बाहर निकल आए और नेत्र की ओपीडी में पहुंचे।
अंदर घुसने से पहले
ही चपरासी ने उन्हें रोक दिया। उन्हें पर्चा एंट्री कराकर अंदर दाखिल होने
के लिए कहा। इस पर वह नर्स के पास पहुंचे। नर्स ने दिक्कत पूछने के बाद
एंट्री कर दी। ओपीडी में उन्हें जूनियर डॉक्टर ही मिले। जूनियर डॉक्टर ने
पूछा आप कहां से आए हैं तो कमिश्नर बोले भेल का कर्मचारी हूं। कमिश्नर ने
आंख से पानी आने और दर्द होने का रोग बताया।
जूनियर डॉक्टर जैसे ही
टार्च लगाकर आंख चेक करने लगे तो मीडिया कर्मियों ने कैमरे से फोटो खींचनी
शुरू कर दी। इस पर डॉक्टर पूछने लगे कि फोटो क्यों खींची जा रही है। इस पर
कमिश्नर बोले कंपनी में दिखानी पड़ती है। इस समय तक सभी चिकित्सक व
कर्मचारी कमरे में कमिश्नर की मौजूदगी से पूरी तरह अनजान थे लेकिन तभी वहां
मौजूद एक व्यक्ति ने उन्हें पहचान लिया। उसने डॉक्टर के कान में जैसे ही
यह बात फुसफुसाई कि यह कमिश्नर हैं, उनके होश उड़ गए। फिर जूनियर डॉक्टर
उन्हें भीतर वाले कमरे में ले गए और मशीन से जांच की।
कमिश्नर ने
सीनियर डॉक्टर बीके मिसुरिया की गैर मौजूदगी पर सवाल किया तो जूनियर डाक्टर
बोले कि वह क्लास लेने गए हैं। इस पर कमिश्नर बिना कुछ बोले ओपीडी से बाहर
निकल आए। फिर वह दवा काउंटर पर पहुंचे। हालांकि उन्होंने कोई दवा नहीं ली।
नजदीक ही ओपीडी में मरीजों को देख रहे कार्यवाहक प्राचार्य के कक्ष के
बाहर कुछ सेकेंड रुक कर कमिश्नर अपनी गाड़ी की ओर निकल गए। जैसे ही
कार्यवाहक प्राचार्य को कमिश्नर के आने की जानकारी हुई वह उनके पीछे दौड़े।
हालांकि, उनकी कमिश्नर से मुलाकात नहीं हो पाई। बाद में कार्यवाहक
प्राचार्य डा. एनएस सेंगर से जब पत्रकारों ने नेत्र चिकित्सक की अनुपस्थिति
को लेकर पूछा तो उन्होंने कहा कि एक समय में दो जगह ड्यूटी नहीं लगाई जाती
है। डॉक्टर की ड्यूटी ओपीडी में थी।
हो गई जूडा से काम लेने की पुष्टि
झांसी।
काफी समय से सीनियर चिकित्सकों की अनुपस्थिति में ओपीडी में जूनियर
डॉक्टरों के ही मोर्चा संभालने के आरोप लग रहे थे, लेकिन मंडलायुक्त के
निरीक्षण में इसकी पुष्टि हो गई। मरीजों की शिकायत रहती है कि ओपीडी के
दौरान सीनियर डॉक्टर कभी कभार ही आते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज प्रशासन इनके
खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है।
संभागीय परिवहन कार्यालय के बाहर से दलाल खदेड़े गए
झांसी।
शनिवार को मंडलायुक्त के राममोहन राव ने संभागीय परिवहन कार्यालय का भी
औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय के बाहर दलालों के जमावड़े
पर एतराज जताया। इस पर सक्रिय हुए प्रशासनिक तंत्र ने आनन - फानन में
दलालों को खदेड़ दिया।
गाड़ी को दूर खड़ी कर कमिश्नर सामान्य व्यक्ति
की तरह आरटीओ ऑफिस पहुंचे। कार्यालय के बाहर जमा दलालों की भीड़ से गुजरते
हुए वह भीतर जा पहुंचे। यहां भी उन्हें दलालों की धड़ल्ले से चहलकदमी देखी।
ड्राइविंग लाइसेंस सेक्शन में पहुंचकर मंडलायुक्त ने लाइसेंस प्रक्रिया व
फीस की जानकारी ली। तदुपरांत, उन्होंने अन्य पटल भी देखे। काफी समय बाद
अधिकारी - कर्मचारी उन्हें पहचान सके। इससे वहां हड़कंप मच गया। निरीक्षण
के दौरान मंडलायुक्त ने मोबाइल से वीडियोग्राफी भी की। साथ ही कार्यालय में
दलालों की सक्रियता पर एतराज जताया। कमिश्नर के जाने के बाद विभागीय
अधिकारी दलाली पर अंकुश को सक्रिय हो गए। एआरटीओ (प्रशासन) आर के सिंह ने
इसकी सूचना तत्काल नगर निगम को दी। कुछ ही देर में निगम की टीम पीएसी के
साथ मौके पर पहुुंच गई। आनन - फानन में दलालों को खदेड़ दिया गया तथा उनकी
गुमटियां हटा दी गईं।