झांसी। कोरोना महामारी के चलते प्रदेश में वाणिज्य कर विभाग को अप्रैल की तरह मई में भी टैक्स को लेकर करारा झटका लगा है। प्रदेश में मई में 5132 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें आठ अरब 65 करोड़ की राजस्व मिल सका। इसी तरह झांसी जोन (झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, जालौन, महोबा, हमीरपुर) के अंतर्गत आने वाले बुंदेलखंड के सातों जिलों को 120 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें सिर्फ 11 करोड़ 32 लाख रुपये ही राजस्व मिल सका। प्रदेश सरकार का खजाना भरने में वाणिज्य कर विभाग का साठ फीसदी योगदान रहता है।
- झांसी जोन को लगातार दूसरे महीने लक्ष्य का 10 से 15 प्रतिशत ही टैक्स मिल सका। जुलाई से स्थिति सुधरने की उम्मीद है।
प्रदीप कुमार सिंह, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड वन।
विलंब से दाखिल रिटर्न पर शुद्ध कर देयता के आधार पर होगी ब्याज की गणना
प्रदेश में भी अब विलंब से दाखिल वाणिज्य कर पर लगने वाले कर की गणना शुद्ध कर देयता (नेट लायबिलिटी) के आधार पर की जाएगी। पहले यह गणना सकल कर देयता (ग्रॉस लायबिलिटी) के आधार पर की जाती थी। केंद्रीय जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक विलंब से दाखिल रिटर्न पर ब्याज की गणना की नई व्यवस्था प्रदेश में जीएसटी लागू होने की तिथि यानी जुलाई 2017 से ही प्रभावी मानी जाएगी। यानी जुलाई 2017 से अब तक दाखिल रिटर्न पर बकाये ब्याज की गणना नई व्यवस्था के मुताबिक होगी।
व्यापारियों को दे रखीं हैं ये सुविधाएं
प्रदेश सरकार ने कारोबारियों को तीन भागों में बांट दिया है। इसमें पहले में शून्य से डेढ़ करोड़ रुपये तक, दूसरे में डेढ़ से पांच करोड़ और तीसरे में पांच करोड़ और इससे अधिक टर्नओवर रखने वाले कारोबारियों को रखा है। पहले व दूसरे भाग के कारोबारी फरवरी का 30 जून, मार्च का तीन जुलाई व अप्रैल का छह जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। उनसे कोई ब्याज नहीं लिया जाएगा और न ही विलंब शुल्क लिया जाएगा। इसी तरह तीसरे भाग के कारोबारी फरवरी, मार्च व अप्रैल का रिटर्न 24 जून तक जमा कर सकते हैं। कोई विलंब शुल्क नहीं लिया जाएगा। साथ ही 24 जून के पंद्रह दिन बाद तक ब्याज भी 18 प्रतिशत की जगह नौ प्रतिशत लिया जाएगा।