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बेहतर सेहत के लिए सफाई है जरूरी, सभी रखें इसका ध्यान

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झांसी। पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण में दस लाख से कम आबादी वाले शहरों में झांसी महानगर प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहा था, जबकि देश में 18वां स्थान था। इस बार होने वाले सर्वे में झांसी प्रदेश में पहला स्थान हासिल करे और देश की रैंकिंग में भी सुधार आए, इसके लिए नगर निगम की ओर से प्रयास किए जाने लगे हैं। ‘अमर उजाला’ की ओर से भी मुहिम चलाई जा रही है, जिसके सहभागी समाज के विभिन्न वर्गों के लोग बनते जा रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें रेल कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने महानगर की स्वच्छता को लेकर अपने सुझाव रखे व समस्याएं भी बताईं। लोगों ने कहा कि बेहतर सेहत के लिए सफाई जरूरी है।
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रेलवे कर्मचारी कैलाश अग्रवाल ने कहा कि सफाई के लिए हमें केवल सरकार की ओर ही नहीं देखना चाहिए, बल्कि हमें खुद भी आगे आना होगा। अपने घर की तरह बाहर की सफाई की जिम्मेदारी भी खुद उठानी होगी। एनके जैन ने कहा कि स्वच्छता को हमें अपनी आदत बनाना होगा। सफाई की बड़ी बाधा पॉलिथीन है। इसका कम से कम इस्तेमाल करना होगा। मनोज कुमार ने कहा कि बदलाव का बड़ा उदाहरण रेलवे वर्कशॉप है। पहले वर्कशॉप के एक हिस्से में व्यापक गंदगी थी, लेकिन अधिकारियों व कर्मचारियों ने मिलकर इसे स्वच्छ और सुंदर बना दिया है।
चेतन पटैरिया ने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए स्वच्छता जरूरी है। इसकी शुरुआत हम अपने घर और आसपास से करें। प्रभात मिश्रा ने कहा कि सिंगल यूज पॉलिथीन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगना चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने वालों को टोकना भी चाहिए। इससे परिवर्तन होगा। मनोज कुमार सोनकिया ने कहा कि गंदगी से छुटकारा कोई बड़ी बात नहीं है। इसका बड़ा उदाहरण रेलवे की वर्कशॉप है। सफाई के प्रति प्रतिबद्ध होकर हम वातावरण को स्वच्छ बना सकते हैं। जागृति संस्था के राजकुमार थापक ने कहा कि संस्था के माध्यम से नगरा हाट के मैदान के पास लगातार स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है। इससे क्षेत्र में बड़ा बदलाव हुआ है। सफाई की शुरुआत हमें अपने घर और मुहल्ले से करनी चाहिए।
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राम भरत गौड़ ने कहा कि रेल कारखाना स्वच्छता की नजीर बन गया है। इसी मॉडल को महानगर में अपनाकर झांसी को स्वच्छता में पहला मुकाम दिलाया जाए। हर नागरिक स्वयंसेवक की हैसियत से सफाई का ध्यान रखे। गजानन शर्मा ने स्वच्छता पर अपनी पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि ‘मत लो प्लास्टिक की थैली, वरना जगह-जगह रहेगी फैली...’। उन्होंने कहा कि पहले तो हम कम से कम पॉलिथीन का इस्तेमाल करें और बाद में उसे तय स्थान पर ही फेंकें।
वेदांत शर्मा ने कहा कि पब्लिक टॉयलेट की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। इनकी नियमित सफाई का बंदोबस्त किया जाना चाहिए। मयंक कुमार ने कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग के लोग दूसरों को स्वच्छता के प्रति प्रेरित करने का काम करें। सभी पॉलिथीन की जगह कपड़े के थैले का इस्तेमाल करें। अनुज अग्रवाल ने कहा कि जगह-जगह डस्टबिन रखवाए जाएं, ताकि लोग यहां-वहां गंदगी न फैलाएं।
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यह भी दिए सुझाव
- पॉलिथीन का कम से कम इस्तेमाल करें और उसे निर्धारित स्थान पर ही फेंकें।
- जगह-जगह डस्टबिन रखवाए जाएं, ताकि लोग गंदगी यहां-वहां न फैलाएं।
- गंदगी फैलाने वालों को टोकें, इसमें झिझकें नहीं।
- जहां रहूंगा, वहां सफाई रखूंगा, इस मूलमंत्र पर सभी काम करें।
- पॉलिथीन डिस्पोजल की बड़े पैमाने पर व्यवस्था की जानी चाहिए।
- पब्लिक टॉयलेट की नियमित साफ-सफाई होनी चाहिए।
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