नगर निगम द्वारा कराए गए सर्वे में महानगर के विवाह घरों की हकीकत सामने आ गई है। सर्वे रिपोर्ट में 79 विवाह घर बिना नक्शा के बने हैं। केवल दो विवाह घरों के ही नक्शे स्वीकृत हैं। यही नहीं, निगर निगम में सिर्फ 81 विवाह घर पंजीकृत हैं, जबकि महानगर में दो सौ से अधिक विवाह घर बिना किसी पंजीकरण के धड़ल्ले से चल रहे हैं और मोटा माल कमा रहे हैं।
विवाह घरों के बाहर सड़क पर गाड़ियाें की पार्किंग पर रोक लगाने और वहां बिजली, अग्निशमन यंत्र, खाने के कचरा से खाद बनाने, लाइसेंस है या नहीं, इसकी जांच कराने के लिए जिलाधिकारी शिवसहाय अवस्थी ने पिछले दिनों बैठक बुलाई थी। बैठक में एसएसपी डॉ. ओपी सिंह ने विवाह घर संचालकों से आह्वान किया था कि जिनके यहां पार्किंग नहीं है, वह या तो इसका इंतजाम कर लें या फिर विवाह घर बंद कर दें। तब विवाह घर संचालकों ने कहा था कि सभी के विवाह घर में पार्किंग है, लेकिन शादी में आने वाले मेहमान पार्किंग में गाड़ी खड़ी करना उचित नहीं समझते हैं। इसके लिए विवाह घरों में गार्ड रखना अनिवार्य कर दिया गया था, ताकि पार्किंग की व्यवस्था दुुरुस्त रह सके।
जिलाधिकारी ने सभी संचालकों से विवाह घरों का नक्शा स्वीकृत कराने को कहा था। इसके अलावा नगर निगम को जिम्मेदारी सौंपी थी कि विवाह घरों का सर्वे कराएं कि उनमें पर्याप्त व्यवस्थाएं हैं या नहीं। नगर निगम ने कर अधीक्षकों की टीम बनाकर सर्वे कराया था। सर्वे पूरा हो गया है। हालांकि, अभी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है, लेकिन जो हकीकत सामने आई है उसके मुताबिक महानगर में नगर निगम में पंजीकृत 81 विवाह घर हैं। इनमें से 79 विवाह घर ऐसे हैं, जो बिना नक्शा पास कराए चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश में बिजली के कनेक्शन नहीं हैं, बल्कि जनरेटर चलाकर बिजली की खपत पूरी करते हैं।
अब इन बिंदुुओं पर होगी जांच
अब जांच में यह देखा जाएगा कि किस विवाह घर का लाइसेंस है या नहीं, पार्किंग की उचित सुविधा है या नहीं, विवाह घरों में निकलने वाले भोजन से कंपोस्ट खाद बनाने का प्लांट लगा है या नहीं, पर्याप्त कचरा निस्तारण हो रहा है या नहीं, अग्निशमन यंत्र हैं या नहीं, पर्याप्त गार्ड हैं या नहीं। इन सभी की जांच के बाद पूरी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी।
छोटे- बड़े 60 होटल
महानगर में छोटे- बड़े 60 होटल हैं। इनमें से अधिकांश होटलों में कचरा निस्तारण के लिए कंपोस्ट प्लांट नहीं है। होटलों के बाहर पार्किंग का पर्याप्त इंतजाम नहीं है।
बच रहे हैं लाइसेंस लेने से
महानगर में सिर्फ 81 विवाह घरों ने नगर निगम में पंजीकरण कराया है, जबकि कुल विवाह घरों की संख्या दो सौ से अधिक है। यह विवाह घर बिना लाइसेंस बनवाए ही धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। इन्हें न तो नगर निगम का डर है और न ही जिलाधिकारी की कार्रवाई का। यह विवाह घर कौन से मानक पूरे कर रहे और कौन से नहीं, नगर निगम ने इनकी पड़ताल भी नहीं की है।
विवाह घरों की जांच रिपोर्ट आ गई है। इसे तैयार कर नगर आयुक्त, फिर जिलाधिकारी के पास भेजी जाएगी। जो भी निर्णय होगा, उसके अनुरूप कार्रवाई होगी।
- रोहन सिंह, अपर नगर आयुक्त (आर)