लक्ष्य सोनी अपने पिता और परिवार के साथ।
छोटी सी उम्र में ये हुनर, छोटे उस्ताद वाह-वाह
झांसी। कहते हैं कि प्रतिभा की कोई उम्र नहीं होती है। दतिया गेट बाहर में एक किराए के मकान में रहने वाले 12 साल के लक्ष्य सोनी भी छोटी सी उम्र में ऐसी बड़ी महारथ हासिल कर रहे हैं कि तबले पर थिरकती उनकी अंगुलियों को देखकर लोग उन्हें छोटा जाकिर हुसैन बुलाते हैं। लक्ष्य कई मंचों पर अपनी कला का प्रदर्शन कर वाहवाही और पुरस्कार जीत चुके हैं।
लक्ष्य सोनी बताते हैं कि वह लोग गुदरी में परिवार के अन्य लोगों के साथ किराए पर रहते थे। उसके बाद मकान बिक गया तो वह लोग दतिया गेट बाहर में किराए पर रहने लगे। उनके पिता स्कूलों के आयोजनों में जनरेटर का काम करते थे लेकिन ट्रक से हुए एक बड़े एक्सीडेंट में उनके सिर और शरीर की काफी चोट आईं, महीनों इलाज चला। कुछ ठीक हुए तो दोबारा फिर एक्सीडेंट होने से हालत बिगड़ गई। किसी तरह वह स्वस्थ हुए तो आर्थिक समस्या सामने खड़ी हो गई। वर्ष 2020 में लॉकडाउन ने तो पूरे परिवार की कमर तोड़ दी। नौकरी भी नहीं रही। घर का खर्च और बच्चों की फीस भरना मुश्किल हो गया, तब मां मोहिनी ने पापा का साथ दिया और घरों में खाना बनाने का काम शुरू कर गृहस्थी खींची। बड़ी बहनें सोनम, मुस्कान और राशि भी पढ़ रही हैं। इनके पिता संतोष सोनी प्राइवेट नौकरी के बावजूद अपने बेटे को संगीत के क्षेत्र में आगे ले जाना चाहते हैं।
लक्ष्य ने बताया कि लॉकडाउन खुला तो पापा ने अगरबत्ती की फैक्टरी में मशीनें सुधारने का काम ढूंढा। लक्ष्य बताते हैं कि उनके पापा को बचपन से संगीत का शौक है। उन्होंने कई वर्षों तक आरकेस्ट्रा में ढोलक और कांगो बजाया। उन्होंने मेरा भी संगीत के प्रति लगाव देखा तो तबला वादन सिखाना शुरू कर दिया। उनके पास फीस के पैसे कई बार नहीं जुड़ पाए तो संगीत महाविद्यालय ने लक्ष्य का हुनर देखकर उसे स्कॉलरशिप दे दी। आज वह कई मंचों पर अपनी वादन कला का प्रदर्शन कर चुका है। उसकी संगीत के प्रति लगन देखकर परिवार के लोग बहुत खुश होते हैं। लक्ष्य कई पुरस्कार पा चुके हैं। उनके बालों का स्टाइल और तबला बजाने का हुनर देखकर कई लोग उन्हें छोटा जाकिर हुसैन बुलाते हैं।