झांसी। एक दौर था जब गर्मी की छुट्टियों में कॉमिक्स खरीदने के लिए दुकानों पर बच्चों की लाइन लगती थी। आज के समय में बच्चे जानते तक नहीं कि कौन है चाचा चौधरी, पिंकी, बिल्लू। बच्चे सिर्फ टीवी पर आ रहे कार्टून ही देखना पसंद करते हैं।
90 के दशक में चाचा चौधरी, पिंकी, बिल्लू, चंपक, नंदन, चंदामामा, नागराज, विक्रम बेताल, पंचतंत्र की कहानियां, अकबर-बीरबल जैसी तमाम कॉमिक्स पढ़ने का खूब क्रेज था। लेकिन आज के बच्चे कॉमिक्स तो दूर की बात किताबें ही पढ़ना पसंद नहीं करते। आज के बच्चे छोटा भीम, डोरेमोन, मोटू- पतलू, टॉम एंड जेरी जैसे टीवी के कार्टून से बाहर निकलते हैं तो फिर वो मोबाइल गेम्स खेलने लग जाते हैं। किताबों की दुकानों पर अब कॉमिक्स खरीदने इक्का-दुक्का ही खरीददार आते हैं।
दुकानदार सीताराम चौरसिया और सचिन गुप्ता ने बताया कि एक वक्त पर पुरानी कॉमिक्स खरीदने के लिए भी खूब पाठक आया करते थे, लेकिन आज सिर्फ 5-6 ही आ जाएं तो बहुत है।
अभी छुट्टी में तो मैं थोड़ा कार्टून देखती हूं, थोड़ा पढ़ती हूं फिर मोबाइल में गेम खेल लेती हूं। - तनवी जैन
स्कूल की तरफ से एक बार गिफ्ट में मिली तो थी चंपक लेकिन मैंने पढ़ी नहीं कभी। - लक्ष्य गुप्ता
कॉमिक्स तो नहीं पढ़ी लेकिन चाचा चौधरी का नाम सुना है, शायद टीवी पर नाटक आया था। - खुशी गुप्ता
मैंने नहीं सुना चाचा चौधरी, पिंकी, बिल्लू जैसे कॉमिक्स का नाम, मैं तो टीवी पर कार्टून देख लेता हूं। - आयुष अग्रवाल