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Jhansi News: मोबाइल की लत से हिंसक हो रहे बच्चे

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- फोन चलाने से मना करने पर माता-पिता पर जानलेवा हमला भी कर दे रहे
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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन समझकर उन्हें दिन-रात मोबाइल के हवाले छोड़ने वाले माता-पिता को अब सचेत होने की जरूरत है। बच्चों के लिए यह लत इस हद तक खतरनाक हो चली है कि वे अब मां-बाप पर जानलेवा हमला तक कर दे रहे हैं। जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में ऐसे मामले हर दिन आ रहे हैं, जिसमें बच्चे मोबाइल से दूरी बर्दाश्त नहीं कर पा रहे।
भागदौड़ भरी दिनचर्या में बच्चा राने या काम न करने देने पर मां-बाप उसे बहलाने के लिए मोबाइल दे देते हैं। कुछ मिनट के लिए तो यह तरीका ठीक है लेकिन, धीरे-धीरे बच्चे मोबाइल के आदी हो जाते हैं। इसका परिणाम यह हो रहा है कि वह वर्चुअल ऑटिज्म की ओर बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल में ऐसे दो से तीन केस हर दिन आ रहे हैं, जिनमें पांच से लेकर 14 साल तक के बच्चे मानसिक और शारीरिक तौर पर बीमारी का शिकार हो जा रहे हैं।
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ऐसे हो रहे मोबाइल के लती
बच्चे अपने पसंद की वीडियो देखने में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि वह धीरे-धीरे उसके लती हो गए हैं। मनोरोग विशेषज्ञ बताते हैं कि तीन घंटे से अधिक लगातार मोबाइल की स्क्रीन देखते रहने वाले बच्चों में वर्चुअल ऑटिज्म का खतरा बढ़ने लगता है।

ये हैं वर्चुअल ऑटिज्म के लक्षण
बच्चा सामान्य काम से बचने लगता है।
किसी से भी बात करने में कतराता है।
लोगों से नजर मिलाने से भी बचता है।
चिड़चिड़ा हो जाता है।
एक मिनट भी मोबाइल दूर नहीं हो पाता।
यदि वह किसी से बात करता है तो उनके पास शब्द नहीं होते।

विटामिन डी की हो जाती है कमी
वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हुए बच्चों में विटामिन बी और विटामिन डी की कमी होने लगती है। यह इतना खतरनाक है कि यदि समय पर इलाज नहीं कराया जाता तो बच्चे की मौत भी हो सकती है।

ये हैं मामले
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केस 1
जिला अस्पताल में आई सात साल की बच्ची मोबाइल फोन पर आने वाले वीडियो में नागिन का शो देखती थी। धीरे-धीरे वह शो में दिखने वाली नागिन के किरदार में खुद को ढालने लगी। जब उसकी मां अस्पताल आई तो भी वह खुद को नागिन बता रही थी। गनीमत रही कि कुछ समय तक चले इलाज के बाद बच्ची ठीक हो गई।

केस 2
छह साल की बच्ची ने जब अपने स्कूल में सहपाठियों को गालियां देना शुरू कर दिया, तब मां को उसके बारे में पता चला। डॉक्टर ने जब बच्ची का इलाज किया और उससे बात की तो पता चला कि उसने अश्लील वीडियो देखकर ये गालियां सीखी हैं।

केस 3
12 साल के बच्चे की स्थिति तो इस हद तक बिगड़ चुकी थी कि उसके शरीर में विटामिन बी का लेवल एक प्रतिशत रह गया था। माता-पिता उसे लेकर अस्पताल पहुंचे तो बच्चा खुद से चल भी नहीं पा रहा था। कई दिन भर्ती रखकर उसका इलाज किया गया, तब बच्चे को बचाया जा सका।

केस 4
13 साल के लड़के को भी मोबाइल फोन की ऐसी लत लगी कि वह हिंसक हो गया। 18 घंटे तक मोबाइल फोन देखने की बात जब मां को पता चली तो उन्होंने उसका मोबाइल री-चार्ज नहीं कराया। इससे बच्चा इतना हिंसक हो गया कि मां पर जानलेवा हमला कर दिया।
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फोटो :: वर्जन
बच्चों की जिम्मेदारी अभिभावक की होती है। उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चा तीन घंटे से अधिक किसी भी सूरत में मोबाइल फोन न देखे। यदि ऐसे है तो बच्चा वर्चुअल ऑटिज्म का शिकार हो सकता है। कई बार यह समस्या गंभीर भी हो जाती है।
डॉ. शिकाफा ज़ाफरीन, मनोरोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल, झांसी।
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