पहले एक सच्चा दोस्त बनकर दोस्ती निभाई और आज अच्छा हमसफर बनकर शादीशुदा जीवन को उसी अंदाज में जी रहे हैं। इसलिए वर्षों से हैं एक दूसरे के वेलंटाइन। वक्त के साथ हर साल अपने इस रिश्ते की डोर को और मजबूत करते हैं। ऐसे कुछ जोड़ों ने प्रेमी युगलों से अपील की है सच्चे प्यार का सिलसिला हमेशा चलता रहना चाहिए। रिपोर्ट: पंकज कश्यप
सातवीं कक्षा में हुआ प्यार
शहर क्षेत्र की रहने वाली फाबिया ने बताया कि वह और उनके पति फिरोज एक ही स्कूल में एक ही कक्षा में पढ़ते थे। दोनों के बीच दोस्ती हुई बाद में यह दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने जिंदगी भर साथ निभाने का वादा किया पर परिवार की रजामंदी जरूरी थी। किसी प्रकार से दोनों ने अपने परिवारों को एक कर दिया और हंसी खुशी शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं। आज भी दोनों के बीच उतना ही प्यार है जितना 10 साल पहले था। फिरोज बताते हैं कि 10 साल बाद भी वह हर वेलंटाइन को नए उत्साह के साथ मनाते हैं। दूसरों को भी अपने हमसफर को खुश रखने का संदेश देते हैं।
इजहार करने में लगा था वक्त
मानिक चौक निवासी गौरव पारड़कर ने बताया कि अपनी वेलंटाइन में वह ढेरों खूबियां चाहते थे। जब सपना सच हुआ तो उससे ज्यादा खूबियों वाली हमसफर का साथ निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह और उनकी पत्नी 12वीं क्लास में साथ पढ़ते थे। दोनों के बीच दोस्ती थी। मन ही मन दोनों एक दूसरे को चाहते थे पर कभी इजहार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। एक दिन हिम्मत कर गौरव ने उन्हें प्रप्रोज किया और शालिनी ने उसे स्वीकार कर लिया। बस, बाकी थी परिवार की सहमति। वो भी मिल गई। आज भी दोनों उन पुराने पलों को याद कर नए अंदाज में हर साल वेलंटाइन डे मनाते हैं।
पहली नजर में हुआ प्यार
चेलाराम कंपाउंड निवासी कमलेश बजाज बताते हैं कि नौ साल पहले वह कानपुर में एक शादी समारोह में गए थे। वहां, उन्हें अपना हमसफर दिखा। जान पहचान बढ़ाकर राखी (पत्नी) की खूबियां जानीं और उन्हें जीवनसाथी बनाने का निर्णय लिया। परिवारों को कैसे मनाएं, यह दोनों के लिए थोड़ा मुश्किल था पर दोनों ने जिंदगी साथ निभाने के इरादे से प्रयास शुरू किए। न नुकुर के बाद बात बन गई। नौ साल से दोनों में आज उसी उत्साह से रह रहे हैं।