चेहल्लुम पर ताजिये, बुर्राक और अखाड़ों के जुलूस निकाले
झांसी। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में चेहल्लुम पर रविवार को शहर में ताजिये, बुर्राकों व अखाड़ों का जुलूस निकाले गए। इस दौरान करबला के शहीदों को याद कर लोगों की आंखें नम हुईं। साथ ही फिजाओं में या हुसैन, प्यासे हुसैन की सदाएं गूंजतीं रहीं।
हजरत इमाम हुसैन व दीगर शहीदाने करबला का चेहल्लुम रविवार को पूरे अकीदत किया गया। गंधीगर के टपरा पर सुबह से ही ताजियों, बुर्राकों और अखाड़ों का जमावड़ा शुरू होने लगा। यहां पर ताजिये कमेटी के अध्यक्ष याकूब अहमद मंसूरी द्वारा सभी को मिसिलबद्ध किया गया। ताजिये, बुर्राकें व अखाडे़ मिसिलबद्ध होने के बाद जुलूस के रूप में सराफा बाजार, मानिक चौक, सिंधी तिराहा होते हुए रानी महल पहुंचे। यहां से ताजिये व बुर्राकें अपने-अपने इमामबाड़ों के लिए वापस हो गईं व ताजियों ने ठंडा होने के लिए लक्ष्मीताल स्थित करबला का रुख किया। जहां पर ताजियों को ठंडा किया गया।
शाम को दोबारा से ताजिये व बुर्राकें गंधीगर के टपरा पर इकट्ठा होकर मिसिलबद्ध होने के बाद जुलूस की शक्ल में सराफा बाजार, बजाजा बाजार से होते हुए बड़ा बाजार स्थित टंकी पर पहुंचा। जहां से बुर्राकें अपने-अपने इमामबाड़ों के लिए वापस हो गईं। इस दौरान सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त रहे। एसपी सिटी श्रीप्रकाश द्विवेदी, सीओ सिटी डा. मनीष कुमार राहुल, शहर कोतवाल देवेंद्र कुमार द्विवेदी के साथ कई थानों का पुलिस तैनात रही। इस मौके पर नूर अहमद मंसूरी, मुकेश अग्रवाल, अतुल किलपन, मोहम्मद अहमद मंसूरी, मोहन नेपाली, रवीश त्रिपाठी मौजूद रहे।
अखाड़ों ने दिखाईं कलाबाजियां
हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने करबला में भूखे प्यासे रहकर इंसानियत की जंग में तीर, भाले, तलवारों से शहीद हो गए थे। उसी की याद में अखाड़ों का प्रदर्शन किया जाता है। चेहल्लुम के मौके पर बच्चों, नौजवानों के साथ बुजुर्गों ने अखाड़ों में कलाबाजी का प्रदर्शन किया।
कमेटी ने किया ताजियेदारों का स्वागत
वीरागंना महारानी लक्ष्मीबाई ताजिया कमेटी के सदस्यों ने जुलूस मेें मौजूद सभी ताजियेदारों का पुष्पवर्षा कर व पगड़ी पहना कर स्वागत किया। मुहम्मद इस्लाम उर्फ मुन्ना भइया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस मौके पर मौलाना कामिल ने कहा कि दीन इस्लाम व सच का साथ देते हुए हजरत इमाम हुसैन शहीद हो गए थे। अध्यक्षता समिति के सदस्य अब्दुल रशीद ने की।