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यूपी: मौत के 12 साल बाद मृतका के खिलाफ कोर्ट में पेश किए आरोप पत्र, मांगा जवाब

Sat, 27 Jul 2019 03:59 AM IST
Abhishek Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ललितपुर
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कोर्ट - फोटो : Social Media (File Photo)
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थाना जखौरा क्षेत्र में आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज किए गए मुकदमे में अभियुक्त महिला की मृत्यु के बारह वर्ष बाद न्यायालय में पुलिस द्वारा आरोप पत्र पेश किया गया। इस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने थाना जखौरा के एचसीपी जगत सिंह गौर और रामेश्वर सिंह से स्पष्टीकरण मांगा है। पुलिस अधीक्षक को उक्त मामले में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। 

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थाना जखौरा के एचसीपी जगत सिंह गौर ने जखौरा पुलिस को तहरीर देकर बताया था कि वह 31 जनवरी 2018 को एचसीपी बलराम वर्मा के साथ शांति व्यवस्था में जखौरा मार्ग से वापस आ रहे थे। तभी  सूचना मिली कि एक महिला शराब लेकर पुराना बार मार्ग के पुल के नीचे कहीं जाने के लिए खड़ी है। जिस पर वह सुदर्शन डिग्री कॉलेज के आगे गाड़ी खड़ी करके आगे गए और दबिश देकर महिला को रोकते हुए करीब 9:10 बजे पुराना बार मार्ग हाइवे पुलिस ने पकड़ लिया।

पूछताछ में उक्त महिला ने अपना नाम सलीमन (45 वर्ष) पत्नी स्व. शिवराज कबूतरा निवासी डेरा चीरा हार कबूतरा थाना कोतवाली बताया। उसके पास से दस लीटर कच्ची शराब को बरामद किया था। इस मामले में आबकारी अधिनियम की धारा 60 एक्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
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इसके बाद इस मामले में उक्त अभियुक्त सलीमन के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया है। जिस पर न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2018 के आदेश द्वारा यह रजिस्टर दर्ज किया गया और अभियुक्त के खिलाफ सम्मन जारी किया। जिस पर आख्या दी गई कि अभियुक्त की मृत्यु बारह-तेरह वर्ष पूर्व हो चुकी है।

इसके बाद इस मामले में उक्त अभियुक्त सलीमन के खिलाफ पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया गया है। जिस पर न्यायालय ने 16 अक्टूबर 2018 के आदेश द्वारा यह रजिस्टर दर्ज किया गया और अभियुक्त के खिलाफ सम्मन जारी किया। जिस पर आख्या दी गई कि अभियुक्त की मृत्यु बारह-तेरह वर्ष पूर्व हो चुकी है।

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कोर्ट में भ्रामक रिपोर्ट पर उपनिरीक्षक से मांगा स्पष्टीकरण

इस संबंध में ग्राम प्रधान द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र की मूल प्रति भी न्यायालय में तलब कर पेश की गई, जिसमें यह प्रमाणित किया गया है कि उक्त महिला की मृत्यु बारह-तेरह वर्ष पूर्व हो चुकी है। इस मामले में न्यायालय ने उक्त एचसीपी को पत्र लिखकर उनके इस कृत्य को निंदा बताया और लापरवाही बताते हुए एचसीपी जगत सिंह गौर एवं रामेश्वर सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। 

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने थाना कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक मुलायम सिंह को न्यायालय में भ्रामक रिपोर्ट देने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। सीजेएम कोर्ट ने उपनिरीक्षक को दिए नोटिस में बताया कि सात जुलाई 2019 को आवेदक प्रमोद पुत्र स्व.रामदास के द्वारा आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिस पर उनके थाने से 17 जुलाई 2017 को नियत करते हुए आख्या आहूत की गई थी। जिसमें 17 जुलाई 2017 को यह आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी कि प्रमोद पुत्र रामदास ढीमर थाना स्थानीय किसी मुकदमे में वांछित नहीं है।

26 जुलाई 2019 को उपरोक्त अभियुक्त प्रमोद को मुकदमा अपराध संख्या 428/19 अंतर्गत धारा 323, 504, 354 में गिरफ्तार कर रिमांड के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से मालूम होता है कि उपरोक्त मुकदमा चार जून 2019 को पंजीकृत किया गया है। इस प्रकार अभियुक्त के वांछनीय होने के संबंध में न्यायालय में मिथ्या एवं भ्रामक रिपोर्ट प्रेषित की गई है, जो घोर निंदापरक है। जिस पर सीजेएम ने उक्त मामले में 27 जुलाई को व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।
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