इस संबंध में ग्राम प्रधान द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र की मूल प्रति भी न्यायालय में तलब कर पेश की गई, जिसमें यह प्रमाणित किया गया है कि उक्त महिला की मृत्यु बारह-तेरह वर्ष पूर्व हो चुकी है। इस मामले में न्यायालय ने उक्त एचसीपी को पत्र लिखकर उनके इस कृत्य को निंदा बताया और लापरवाही बताते हुए एचसीपी जगत सिंह गौर एवं रामेश्वर सिंह से स्पष्टीकरण तलब किया है और पुलिस अधीक्षक को इस मामले में संबंधित के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौरसिया की अदालत ने थाना कोतवाली में तैनात उपनिरीक्षक मुलायम सिंह को न्यायालय में भ्रामक रिपोर्ट देने के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। सीजेएम कोर्ट ने उपनिरीक्षक को दिए नोटिस में बताया कि सात जुलाई 2019 को आवेदक प्रमोद पुत्र स्व.रामदास के द्वारा आत्मसमर्पण प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिस पर उनके थाने से 17 जुलाई 2017 को नियत करते हुए आख्या आहूत की गई थी। जिसमें 17 जुलाई 2017 को यह आख्या न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी कि प्रमोद पुत्र रामदास ढीमर थाना स्थानीय किसी मुकदमे में वांछित नहीं है।
26 जुलाई 2019 को उपरोक्त अभियुक्त प्रमोद को मुकदमा अपराध संख्या 428/19 अंतर्गत धारा 323, 504, 354 में गिरफ्तार कर रिमांड के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। प्रथम सूचना रिपोर्ट के अवलोकन से मालूम होता है कि उपरोक्त मुकदमा चार जून 2019 को पंजीकृत किया गया है। इस प्रकार अभियुक्त के वांछनीय होने के संबंध में न्यायालय में मिथ्या एवं भ्रामक रिपोर्ट प्रेषित की गई है, जो घोर निंदापरक है। जिस पर सीजेएम ने उक्त मामले में 27 जुलाई को व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं।