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Jhansi News: चंद्रशेखर आजाद का झांसी में बना था मोटर ड्राइविंग लाइसेंस नंबर-67, एसपी के हस्ताक्षर से हुआ था जारी

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। काकोरी में ट्रेन लूट की घटना ने ब्रिटिश सरकार को हिलाकर रख दिया था। कानून-व्यवस्था को सीधे चुनौती मिलने से अंग्रेज पुलिस ने घटना को अंजाम देने वालों की धर-पकड़ में पूरी ताकत झोंक दी। इस मामले में अशफाक, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी समेत 40 से अधिक क्रांतिकारी गिरफ्तार हुए लेकिन चंद्रशेखर आजाद पुलिस को चकमा देने मेें कामयाब रहे। चंद्रशेखर आजाद कई दफा अंग्रेज अफसरों के सामने भी गए लेकिन चतुराई से खुद को बचा ले गए।



आजाद ने झांसी में ही रहकर अपना डीएल बनवाया था। झांसी के तत्कालीन एसपी एम. इंग्लिश ने आजाद का इंटरव्यू लिया। एसपी ने ही उनको डीएल जारी किया लेकिन वह भी आजाद को पहचान नहीं सका। इतिहासविद् आलोक शर्मा ने आईपीएस प्रताप गोपेंद्र की लिखी किताब चंद्रशेखर आजाद मिथक बनाम यथार्थ, एससी हॉलिंग की नो टेन कमेंडमेंट्स समेत अन्य किताबों का हवाला देते हुए बताया कि काकोरी कांड को अंजाम देने के बाद 25-26 सितंबर 1925 को चंद्रशेखर आजाद झांसी आए। पहचान छुपाने में माहिर आजाद ने नई बस्ती निवासी मास्टर रुद्र नारायण के यहां शरण ली।
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रुद्र नारायण के यहां क्रांतिकारियों के आने-जाने से ब्रिटिश सरकार उनकी पहरेदारी रखती थी। उनके यहां नियमित तौर पर सीआईडी का हेड कॉस्टेबल कम्मोद सिंह आता था। कम्मोद को पंजा लड़ाने का शौक था। यहां आजाद भी उससे पंजा लड़ाते रहे। कम्मोद उनको नहीं पहचान सका। इलाहाबाद (प्रयागराज) में शहीद होने के बाद चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर देखने के बाद कम्मोद उनको पहचान सका। यह बात उस समय के सरकारी रिकॉर्ड में भी दर्ज है।
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अज्ञातवास के दौरान आजाद ने सदर बाजार स्थित बुंदेलखंड मोटर्स वर्क्स में पहचान छुपाकर काम किया। काम के दौरान उन्होंने वाहन चलाना सीखा। किताबों में जिक्र है कि वाहन चलाने के लिए डीएल की जरूरत होने पर इसे बनवाने का निर्णय लिया। सुभाषगंज (हार्डीगंज) में भगवानदास माहौर ने इसका मसौदा लिखा। लाइसेंस के लिए आजाद ने अपना नाम हरिशंकर पुत्र सीताराम निवासी नई बस्ती दर्ज कराया। इसी नाम से वह ओरछा में रह चुके थे। उस दौर में मोटर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का अधिकार पुलिस के पास था। एसपी के इंटरव्यू लेने के बाद डीएल जारी होता था। जिस समय आजाद को ब्रिटिश सरकार खोज रही थी, उसी समय आजाद ने ब्रिटिश अफसर के सामने बैठकर अपना लाइसेंस बनवाया। उनके लाइसेंस का नंबर 67 था।
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