आयकर अधिवक्ता संघ के तत्वावधान में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में बजट 2017 में आयकर अधिनियम में किए गए बदलाव की जानकारी दी गई। साथ ही व्यापारी और अधिवक्ताओं की समस्याओं और शंकाओं का समाधान भी किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि आयकर अधिकारी आशीष सिंह ने कहा कि इस वर्ष आयकर अधिनियम में सबसे अधिक संशोधन किए गए हैं, जिनकी जानकारी व्यापारी को होना आवश्यक है। जानकारी के अभाव में वर्ष समाप्ति के बाद व्यापारी को कोई मौका नहीं रह जाता है कि वह अपनी भूल का संशोधन कर सके। विशिष्ट अतिथि रामगोपाल गुप्ता ने कार्यशाला के आयोजन की सराहना की। संघ के अध्यक्ष विजय खन्ना ने कहा कहा कि अब कोई भी व्यापारी अनुमान के आधार पर अपनी आय की गणना कर आय विवरणी दाखिल नहीं कर सकेगा। उसे अपना संपूर्ण देनदारी और लेनदारी की घोषणा के साथ कुल प्राप्ति की घोषणा करना आवश्यक किया गया है। कार्यशाला में चार्टर्ड एकाउंटेंट निमेष खन्ना ने आयकर बदलाव की जानकारी प्रोजेक्टर के माध्यम से दी। संचालन राजेश चंद्र गुप्ता ने किया।
यह हुए बदलाव
- कोई भी व्यक्ति दो लाख तथा उससे अधिक धनराशि नकद में प्राप्त नहीं कर सकता।
- नकद में धनराशि प्राप्त करने पर 100 प्रतिशत अर्थदंड का प्रावधान रखा गया।
- नकद के प्रावधान में सरकारी भुगतान, बैंक और डाकघर से प्राप्त राशि को इस श्रेणी से मुक्त रखा गया।
- नकद प्राप्ति में बीमा का भुगतान और कृषि के उत्पादन को मुक्त रखा गया है।
- दो करोड़ की सीमा के अंदर आने वाले व्यापारियों की आठ प्रतिशत शुद्ध लाभ की जगह छह प्रतिशत शुद्ध लाभ पर आय की गणना का प्रावधान।
- संस्था को नकद दान देने पर छूट की सीमा दस हजार से घटाकर दो हजार कर दी गई।
- 50,000 या इससे अधिक किराए के भुगतान पर पांच प्रतिशत कटौती का नया प्रावधान।
- पूंजीगत लाभ की गणना के लिए 1981 आधार वर्ष को हटाकर वर्ष 2001 किया गया।
- प्रोफेशनल में ली जाने वाली फीस पर टैक्स कटौती 10 प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत की गई।
- लाभ की छूट सीमा पांच हजार से घटाकर ढाई हजार की गई।
- आय सीमा पांच लाख से घटाकर साढ़े तीन लाख रुपये की गई।
- पूंजीगत लाभ से प्राप्त धनराशि निवेश की सीमा 36 माह की जगह 24 माह की गई।
- व्यापारी को अपनी दो वर्ष की आय विवरणी दाखिल करने पर जुर्माना देना होगा।
- ऑडिट की सीमा बढ़ाकर दो करोड़ की गई।