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बाहर से इंजेक्शन खरीदकर ला रहे और सरकारी अस्पताल में लगवा रहे

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झांसी। मर जाएं अच्छा है मगर एंटीरेबीज इंजेक्शन खरीदकर तो नहीं लगवा पाऊंगा। जिला अस्पताल में इंजेक्शन की चौथी डोज लगवाने के लिए एक सप्ताह से भटक रहे बुजुर्ग रूपनारायण सक्सेना ने अपना दर्द कुछ इसी तरह बयां किया। अस्पताल में जून में दूसरी बार इंजेक्शन खत्म हो गए, जो अब तक नहीं आए हैं। हाल ये है कि अस्पताल में 350 रुपये खर्च करके मरीज बाहर से इंजेक्शन खरीदकर ला रहे हैं और फिर लगवा रहे हैं।
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जिला अस्पताल में छह जून को एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गए थे। इसके बाद 10 जून को करीब 270 शीशियां आ गई थीं। एक शीशी से चार मरीजों को इंजेक्शन लगता है। 22 जून को फिर से इंजेक्शन खत्म हो गए। तब से अब तक 12 दिन हो गए हैं लेकिन अस्पताल में इंजेक्शन नहीं आ पाए हैं। जबकि, रोजाना डेढ़ सौ मरीज एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आते हैं। कुत्ते के काटने के बाद एआरवी उसी दिन लगता है। इसके बाद तीसरे, सातवें और फिर 28वें दिन इंजेक्शन लगाया जाता है। अब इंजेक्शन खत्म हो जाने के बाद कई मरीजों का ये कोर्स पूरा नहीं हो पाया है। बाहर से खरीदने पर एक इंजेक्शन 350 रुपये का आता है। कई रोगी तो निजी मेडिकल स्टोरों से इंजेक्शन लाकर अस्पताल के स्टाफ से लगवा रहे हैं। इस मामले में सीएमएस डॉ. आरके सचान ने कहा कि यूपी मेडिकल कॉरपोरेशन से एआरवी की मांग की गई है। डीएम ने भी शासन को पत्र लिखा है। जल्द ही इंजेक्शन प्राप्त हो जाएंगे।
मां को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने आया हूं मगर स्टाफ ने कहा कि डॉक्टर से लिखवाकर आओ। डॉक्टर बैठे नहीं है। पता चला कि इंजेक्शन भी खत्म हो गए हैं। - आशीष कुमार।
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शनिवार को कुत्ते ने काटा था। उस दिन इंजेक्शन न होने से जिला अस्पताल में नहीं लग पाया। अब सोमवार को भी इंजेक्शन नहीं होने पर 350 रुपये में खरीदकर लाया हूं। - कल्लू।
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