बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में वाहन के इंतजार में झलकारी बाई हॉस्टल की एक छात्रा पेट दर्द से सुबकते-कराहते बेहोश हो गई। आधे घंटे तक इंतजार करने के बाद पीड़िता की साथी छात्राओं ने खुद पैसे खर्च करके उसे ऑटो से मिलेट्री अस्पताल पहुंचाया। वहां, उपचार के बाद उसे राहत मिली।
सेमिनार, आयोजनों, निर्माण कार्य आदि में पानी की तरह पैसा बहाने वाला बुंदेलखंड विश्वविद्यालय छात्र-छात्राओं को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में नाकाम साबित हो रहा है। हाल यह है कि हॉस्टलों में एक हजार से ज्यादा छात्र-छात्राएं रहते हैं, इसके बावजूद एक भी एंबुलेंस नहीं है। छात्र-छात्रा की हालत बिगड़ने पर तुरंत उपचार नहीं मिल पाता है। शनिवार को छात्रों की सुविधाओं को लेकर बीयू की उदासीनता का एक उदाहरण सामने आया। झलकारी बाई हॉस्टल की एक छात्रा के पेट में तेज दर्द हुआ। साथी छात्राओं ने वार्डन को फोन करके एंबुलेंस बुलाने को कहा। करीब आधा घंटे से ऊपर हो जाने पर पीड़ित छात्रा दर्द से कराहते-कराहते बेहोश हो गई। उसके साथी छात्राओं के हाथ पांव फूल गए। पीड़िता के पिता ने फोन पर साथी छात्राओं से मिलेट्री हॉस्पिटल ले जाने को कहा। डॉक्टरों के उपचार करने के बाद उसे राहत मिली।
वार्डन डॉ. यशोधरा शर्मा ने बताया कि कुछ समय पहले हुई वार्डनों की बैठक में एंबुलेंस लाने का प्रस्ताव दिया गया था। जल्द ही एंबुलेंस आने की संभावना है। अब छात्रा की हालत ठीक है।
200 रुपये लेते मेडिकल फीस
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं से हर साल मेडिकल फीस के रूप में दो सौ रुपये भी लिए जाते हैं। अब तक लाखों रुपये मेडिकल फीस से बीयू के खाते में जमा हो गए होंगे, इसके बावजूद एक एंबुलेंस की खरीद नहीं हो सकी है। जबकि, अधिकारियों को आवश्यकता पड़ने पर तुरंत गाड़ियों की खरीद हो जाती है।