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बुंदेलखंड में हर महीने गैंगरीन के 50 नए मरीज मिल रहे, गंवाने पड़ रहे अंग

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बुंदेलखंड में हर माह गैंगरीन के 50 मरीज आए है। - फोटो : ???? ????
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बुंदेलखंड में हर माह गैंगरीन के 50 नए मरीज मिल रहे, गंवाने पड़ रहे अंग
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झांसी। शरीर में ब्लड सर्कुलेशन ठीक तरह से नहीं होने या फिर किसी खास स्थान के टिश्यू खून के कम प्रवाह और दबाव की वजह से सड़ने-गलने या सूखने लगते हैं तो भयानक और जानलेवा रोग गैंगरीन हो जाता है। यह खास तरह की बीमारी है, जिसमें शरीर के कुछ खास हिस्सों में टिश्यूज यानी ऊतक नष्ट होने लगते हैं। इस कारण वहां घाव बन जाता है, जो लगातार फैलता जाता है। समय रहते यदि समस्या का इलाज न किया जाए तो स्थिति बहुत अधिक भयावह हो सकती है। बुंदेलखंड में इस बीमारी के रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। हर महीने लगभग 50 नए मरीज बीमारी का इलाज कराने के लिए डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं।
मधुमेह के अधिकतर रोगियों को अपने खानपान का पूरा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ज्यादातर मामलों में गैंगरीन की मुख्य वजह शुगर की बीमारी ही कारण बनती है। शरीर में यदि खून का प्रवाह किसी कारण से बाधित या कम होता है तो कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती हैं।
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खून के साथ ऑक्सीजन का प्रवाह होता है, जो हमें जीवित रखने के लिए आवश्यक है। मगर जब शरीर में शुगर की मात्रा अधिक हो जाती है तो धमनियों में प्रवाहित होने वाले खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इससे रक्त का प्रवाह भी प्रभावित होता है और टिश्यूज इसका पूरा लाभ भी नहीं ले पाते हैं। इस स्थिति में धीरे-धीरे ये टिश्यू मरने लगते हैं, जो बाद में गैंगरीन का रूप ले लेते हैं। इसके अलावा बहुत अधिक मात्रा में धूम्रपान करना और ह्रदय रोगियों को भी यह बीमारी होने की संभावना रहती है। सरकारी और निजी अस्पतालों को मिलाकर हर महीने 50 नए रोगी इस बीमारी के मिल रहे हैं। दस साल में डेढ़ गुने तक मरीज बढ़ गए हैं।
गैंगरीन केे तीन प्रकार
गैंगरीन मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है। इनमें सूखा गैंगरीन, नम गैंगरीन और गैस गैंगरीन शामिल हैं। सूखा गैंगरीन शरीर के बाहरी हिस्सों में विकसित होता है। जबकि, नम गैंगरीन शरीर के उन हिस्सों में विकसित होता है, जहां के टिश्यूज नम होते हैं। जैसे हमारे मुंह या फेफड़ों में। गैस गैंग्रीन वह होता है, जिसमें त्वचा के टिश्यूज में बैक्टीरिया पनप जाते हैं, जो दूषित गैस का उत्सर्जन करते हैं। इससे आसपास की त्वचा में तेजी से संक्रमण फैलता है।
डायबिटीज से होती है पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज
डायबिटीज केवल शरीर के किसी एक हिस्से पर अपना असर नहीं दिखाती, बल्कि यह रक्त के प्रवाह को प्रभावित करती है। ब्लड फ्लो कम होने से शरीर में लगी किसी चोट या घाव को भरने में बहुत समय लगता है। हाथ व पैर में ब्लड का फ्लो कम होना पेरिफेरल वैस्कुलर डिजीज कहलाती है। जो लोग इस परेशानी से जूझ रहे होते हैं, उनमें अल्सर और गैंगरीन जैसी समस्या होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है।
इस तरह बच सकते
- संतुलित खानपान करें
- धूम्रपान नहीं करें
- नियमित व्यायाम करें
- हाथ-पैर में सुन्नपन, नाखून में पीलापन आने पर डॉक्टर को दिखाएं
ये हैं लक्षण
गैंगरीन के शुरूआती लक्षणों में हाथ-पैरों में सुन्नपन और नाखून में पीलापन आना है। इसके साथ ही शरीर के उस अंग में तेज दर्द शुरू हो जाता है। बाद में वह अंग काला पड़ने लगता है। जो कि तेजी से बढ़ता जाता है।
ये हैं मामले
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केस-1
शहर निवासी 40 वर्षीय युवक को कुछ समय से पैर में सुन्नपन और दर्द की शिकायत बनी हुई थी। इसी दौरान पैर के निचले हिस्से में हल्का घाव हो गया। कुछ ही दिन में दर्द असहनीय हो गया। पैरों में कालापन आना शुरू हो गया। डॉक्टर को दिखाया तो उसने गैंगरीन बताते हुए पैर काटने की सलाह दी। मरीज एक से दूसरे डॉक्टर को दिखाता रहा। इसी बीच दूसरे पैर के पंजे भी काले पड़ने लगे। बाद में मरीज के दोनों पैर काटने पड़े।
केस-2
सीपरी बाजार निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति को आठ साल पहले गैंगरीन हो गई थी, तो उनके पैर की दो अंगुलियों को काट दिया गया था। डॉक्टरों ने उन्हें धूम्रपान नहीं करने की सलाह दी। कुछ सालों के बाद उन्होंने धूम्रपान करना फिर शुरू कर दिया। इसके बाद यह बीमारी फिर से पनप गई। पंजों में कालापन आने पर डॉक्टर को दिखाया तो गैंगरीन बता दिया। इसके बाद अस्पताल में भर्ती करके व्यक्ति के पैर का पंजा काटना पड़ गया।
ये बोले विशेषज्ञ
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धूम्रपान करने वालों, मधुमेह और ह्रदय रोगियों को गैंगरीन होने की संभावना अधिक रहती है। यह बीमारी तीन प्रकार की होती है। बुंदेलखंड में ड्राई गैंगरीन के रोगी लगातार बढ़ रहे हैं। औसतन हर महीने बुंदेलखंड के 35-40 नए रोगी दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं। - डॉ. दिनेश राजपूत, न्यूरो सर्जन, मेडिकल कॉलेज।
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बिगड़ी जीवनशैली, खून को ले जाने वाली नसों की बीमारी, बीपी, मधुमेह व ह्रदय रोगियों को गैंगरीन होने की संभावना ज्यादा रहती है। सर्दियों में यह बीमारी ज्यादा होती है, क्योंकि नसें सिकुड़ने से खून का संचार सही से नहीं हो पाता। बिगड़ा खानपान व धूम्रपान से इस बीमारी के रोगी बढ़ रहे हैं। - डॉ. अरविंद कनकने, न्यूरोलॉजिस्ट, मेडिकल कॉलेज।
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