चारा का उत्पादन बढ़ाने के लिए सीएसए और आईजीएफआरआई के बीच समझौता हुआ है।
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बुंदेलखंड में चारा उत्पादन को बढ़ावा देंगे सीएसए और आईजीएफआरआई
झांसी। बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश में चारा उत्पादन और कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए बड़ी पहल हो रही है। चारा अनुसंधान शिक्षण, शोध और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर (सीएसए) और भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान झांसी (आईजीएफआरआई) के बीच करार हुआ है। इसके बाद दोनों संस्थान चारा और कृषि तकनीकों के विकास के लिए काम करेंगे।
झांसी में स्थित भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान चारा फसलों के उत्पादन को लेकर लगातार नए-नए शोध करा रहा है। संस्थान अब तक 45 से अधिक चारा फसलों को विकसित कर चुका है। इसके साथ ही संस्थान द्वारा विकसित की गई तकनीकों को ओडिशा, राजस्थान, पश्चिम बंगाल समेत देश के कई राज्यों के किसान अपना रहे हैं। अब संस्थान की कृषि तकनीक और शोध को बुंदेलखंड और मध्य उत्तर प्रदेश तक विकसित करने के लिए पहल की गई है। भारतीय चरागाह और चारा अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विजय यादव और चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने चारा अनुसंधान को आगे बढ़ाने के लिए करार किया है। जिसके तहत कृषि विवि के स्नातकोत्तर और पीएचडी विद्यार्थी चारा अनुसंधान को लेकर झांसी के संस्थान में शोध कर सकेंगे। दोनों संस्था मिलकर संयुक्त शोध के जरिए नई तकनीकों को विकसित करेंगे। इसके साथ ही चारा अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक समय-समय पर कानपुर कृषि विवि जाकर विद्यार्थियों और प्रोफेसरों को विभिन्न प्रशिक्षण देंगे। चारा अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. विजय यादव ने बताया कि यह पहला मौका है कि कृषि प्रसार और चारा उत्पादन को लेकर कृषि विवि के साथ समझौता हुआ है। इससे चारा और कृषि प्रसार क्षेत्र में कई नए प्रयोग होंगे। जिसका किसानों और पशुपालकों को फायदा मिलेगा।