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बुंदेलखंड के पशुओं की सुधरेगी नस्ल, बढ़ेगा दूध का उत्पादन

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झांसी। दतिया में बन रहे रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान कॉलेज और मत्स्यकीय महाविद्यालय में रिसर्च पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। इसके जरिए बुंदेलखंड के पशुओं की नस्ल सुधारी जाएगी। इसके अलावा पशुपालन के जरिए दूध का उत्पादन कर इससे शुद्ध पदार्थ जैसे पनीर, घी आदि बनाकर बिक्री की जाएगी।
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पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान कॉलेज और मत्स्यकीय महाविद्यालय का 27 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वर्चुअल शिलान्यास किया था। यह कॉलेज डेढ़ साल में बनकर तैयार होना है। 2022 में कक्षाएं संचालित होने लगेंगी। इसके अलावा पशुओं के मद्देनजर यह कॉलेज काफी लाभप्रद साबित हो सकता है। इन कॉलेजों से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत राजस्थान को भी लाभ मिलेगा। यहां पर क्लीनिक में पशुओं का उपचार तो होगा ही। साथ-साथ मछली, बकरी, भेड़, शूकर आदि पालन होगा। खास बात ये होगी कि ये महाविद्यालय बुंदेलखंड के पशुओं की नस्ल सुधारने की दिशा में भी काम करेंगे। इससे छुट्टा जानवरों की समस्या कम होगी। वहीं, टीकाकरण, गंभीर रोग का सही से उपचार किया जा सकेगा। जगह-जगह पशु चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। इससे पशुपालकों को घर के नजदीक ही अपने पशुओं का उपचार कराने का मौका मिलेगा। इसके अलावा मल्टीपल ओव्यूल एंब्रियो फर्टाइल तकनीकी से छुट्टा जानवर अच्छी नस्ल की गाय-बछड़े पैदा करने में मददगार साबित हो सकेंगे। वहीं, किसान भी कई आधुनिक तकनीकों से रूबरू हो सकेंगे।
स्टार्टअप इंक्यूबेशन सेंटर भी बनेंगे
इन महाविद्यालयों में दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भी काम किया जाएगा। डेयरिंग का स्कोप बढे़गा तो किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा। वहीं, स्टार्ट अप इंक्यूबेशन सेंटर भी बनेंगे। यहां पर दूध से बनने वाले शुद्ध पदार्थों की भी बिक्री होगी। ऐसे में लोगों को शुद्ध दूध, घी, पनीर आदि मिल सकेगा।
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यहां पर रैबिट आदि एनिमल यूनिट बनेंगी। इसके अलावा यहां पर बीज प्रसंस्करण का प्लांट भी लगाया जा रहा है, जिसमें मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा आदि उगाएंगे। इसका उद्देश्य बुंदेलखंड की भौगोलिक परिस्थिति के मद्देनजर उपयुक्त मोटे अनाज की खेती को बढ़ावा देना है। अगले तीन महीने में बनकर तैयार हो जाएगा। नए-नए किस्मों के बीज किसानों को मिलेंगे।
दतिया में बन रहे दोनों महाविद्यालय बुंदेलखंड समेत उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के लिए बेहद लाभप्रद साबित होंगे। यहां पर बुंदेलखंड के पशुओं की नस्ल सुधारने की दिशा में काम किया जाएगा। जगह-जगह पशु चिकित्सा शिविर लगाए जाएंगे। पशुपालन को भी बढ़ावा मिलेगा। किसानों को कई आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिलेगी। - डॉ. अरविंद कुमार, कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय।
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