बुंदेली फिल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन झांसी निवासी निर्माता किशोर चक्रवर्ती की फिल्म ‘सांचौ संग पिया कौ’ छाई रही। फिल्म में बुंदेली त्यौहारों, रहन-सहन, संस्कृति को बखूबी दिखाया गया है। बुंदेली संस्कृति के जानकार हरगोविंद कुशवाहा ने कहा फिल्म की सीडी राष्ट्रपति को भेजकर इसे पुरस्कृत करने की अपील की जाएगी। उन्होंने कहा कि फिल्म को पुरस्कार मिलने से बुंदेली संस्कृति के विकास में मदद मिलेगी। वहीं, आयोजन बुंदेलखंड फिल्म एसोसिएशन ने तीन दिवसीय फेस्टिबल की सफलता को देखते हुए इसे 02 जनवरी तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
राजकीय संग्रहालय में चल रहे बुंदेली फिल्म फेस्टिबल में शनिवार को धीरज श्रीवास्तव की फिल्म ‘तिरंगा’, सोहेल खान चरखारी की फिल्म ‘गांव की माटी’, जे. के. शर्मा झांसी की ‘अ- कोवलर’, अर्जुन रायकवार मोंठ की शार्ट फिल्म ‘जिम्मेदार कौन’ व ‘अभी नहीं तो कभी नहीं’, संजय भदौरिया इटावा की ‘राम जनम’, शकील खान उरई की फिल्म ‘जुर्म’ प्रदर्शित की गई। फिल्में देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे। उन्होंने फिल्मों को सराहा भी।
फिल्म ‘सांचौ संग पिया कौ’ के गीत ‘मोरौ जबरईं कर दऔ ब्याव, तनक न माने घरवारे...’ में नेचुरल बुंदेली पुट होने के कारण उसे खूब पसंद किया गया। एक घंटे की इस फिल्म की शूटिंग मप्र के शक्तिभैरव गढ़कुंडार में हुई है। जेडीए के पूर्व अध्यक्ष हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि प्रेमचंद के ‘गोदान’ उपन्यास के ‘होरी’ पात्र को इस फिल्म में बेहतर तरीके से उभारा गया है। इसमें बुंदेली संस्कृति को भी उभारा गया है। फिल्म में ‘नदिया के पार’ का भी पुट है। ऐसी फिल्मों से बुंदेली भाषा को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
इस दौरान निर्माता निर्देशक, डा. नीति शास्त्री, संजय तिवारी राष्ट्रवादी, देवदत्त बुधौलिया, रजनीश श्रीवास्तव, राकेश विश्वकर्मा, शिवम यादव, शीलू पंडित, सुंदर लिखार, धर्मेंद्र खरे, सचिन ताम्रकार, विमल, दीपक सेठ, बिरजू परिहार, प्रीति शर्मा, संजीव तिवारी, शरद नामदेव, मोंटी उपस्थित रहे।
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आज यह फिल्में दिखाई जाएंगी
रविवार को सुबह 10 बजे से शाम 06 बजे तक फिल्म ‘स्वच्छ भारत की शान’, ‘किसान’, ‘कीप क्लीन इंडिया’, ‘लल्ला हो लल्ला’, ‘छूमंतर’, ‘शुभ आरंभ’, ‘हमीरपुर के दर्शन’, ‘बैड ड्रीम’, ‘हार की जीत’, ‘ज्वाइंट’, ‘परशु परशा परशुराम’, ‘उजियारा’, ‘बस एक गुजारिश है’, ‘उज्ज्वला’ और ‘वैभव लक्ष्मी’ फिल्में दिखाई जाएंगी।