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अब सेना के जवानों के लिए ऐसी बुलेट प्रूफ जैकेट बनेगी जिसे 14 गोलियां भी नहीं भेद पाएंगी

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झांसी। अब सेना के जवानों के लिए एक ऐसी बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार होगी जिसे 14 गोलियां भी नहीं भेद जाएंगी। जवानों के लिए सिर से पांव तक का मजबूत सुरक्षा कवच तैयार होगा। झांसी में छह हजार एकड़ में यूनिट लगाने जा रही टाइटन एविऐशन एंड एरोस्पेस कंपनी इस पर काम करेगी। तीन साल के भीतर यूक्रेन टेक्नोलॉजी से जैकेट बना ली जाएगी। यह कंपनी झांसी में लड़ाकू विमान का इंजन भी बनाएगी।
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झांसी में डिफेंस कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 5071.19 हेक्टेअर भूमि में इसकी स्थापना की योजना है। कॉरिडोर के लिए ली जाने वाली कुल भूमि का 59 फीसदी हिस्सा झांसी में विकसित किया जा रहा है। कॉरिडोर के अंतर्गत झांसी में टाइटन एविऐशन एंड एरोस्पेस इंडिया लिमिटेड छह हजार एकड़ में यूनिट लगा रही है। इस सेक्टर में 38 हजार करोड़ से अधिक निवेश की संभावना है। कंपनी के चेयरमैन के गिरी कुमार ने बताया कि हम डिफेंस और एरोस्पेस से संबंधित काम करेंगे। यूक्रेन टेक्नोलॉजी से बुलेट प्रूफ जैकेट बनाई जाएगी जिस पर 14 गोलियों का भी कुछ असर नहीं होगा। नागरिक विमान तैयार करने के लिए झांसी में पायलट ट्रेनिंग सिमुलेशन सेंटर बनाएंगे। एक चार्टर सर्विसेस भी शुरू करेंगे। उन्होंने बताया कि झांसी में ही लड़ाकू विमान के इंजन बनाए जाएंगे। इसके अलावा मिलेट्री कारगो प्लेन, सिविल प्लेन भी बनाए जाएंगे। जहाजों को निर्यात भी किया जाएगा। कम कीमत वाली एयरलाइंस को भी प्लेन दिए जाएंगे। इनके पुर्जा भी झांसी में बनेंगे। हालांकि, प्लेन से संबंधित सामान 25 से 30 देशों से आयात किया जाएगा। दो-ढाई साल में यहां से प्लेन बनकर निर्यात होने शुरू होंगे। प्लेन से संबंधित सभी सामान भारत में ही बनाने में सात से आठ साल लग जाएंगे।
अभी ये प्लेन बना रही कंपनी
टाइटन एविऐशन एंड एरोस्पेस इंडिया लिमिटेड अभी एएन 74, एन 148, एन 158, एन 178 प्लेन बना रही है। इनमें से जल्द ही कुछ प्लेन बनकर तैयार हो जाएंगे।
बुंदेलखंड में लगेगी रोजगार की झड़ी
कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि यूनिट शुरू होते ही डेढ़ से दो हजार लोगों को रोजगार दिया जाएगा। कुछ ही समय में बुंदेलखंड के आठ से नौ हजार लोगों को इस यूनिट में रोजगार मिलेगा।
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आयात को दोगुना करने का लक्ष्य
भारत यूरोप, यूके और एशिया को सिविल जहाज निर्यात करता है। झांसी में यूनिट लगने के बाद इसका लक्ष्य दोगुना करने की योजना है। आगामी कुछ वर्षों में झांसी से ही सालाना आठ से दस जहाज निर्यात किए जाएंगे।
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