शासन से बजट न मिलने के कारण जल निगम की सभी योजनाएं ठप हो गई हैं। बजट से मिलने वाले सैंटेज (कार्य की राशि से मिलने वाला लाभांश) के न मिलने से कर्मचारियों को जून माह से वेतन भी नहीं मिला है।
जल निगम पेयजल योजनाओं की निर्माण इकाई है। अगर शासन किसी काम के लिए एक लाख रुपये का बजट देता है तो उसमें साढ़े बारह प्रतिशत राशि सैंटेज के रूप में मुख्यालय में जमा हो जाती है। इस राशि से अधिकारी, कर्मचारियों को वेतन और अन्य खर्चों पर व्यय किया जाता है। वर्तमान में जल निगम द्वारा झांसी समेत यूपी में जितनी भी पेयजल योजनाओं पर काम किया जा रहा है, वे बजट के अभाव में बंद पड़ी हैं। यही कारण है कि जून माह से अधिकारी व कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल सका है। इससे अधिकारी व कर्मचारियों में रोष है। हालांकि, अधिकारी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
जल निगम की झांसी जनपद में 14.13 करोड़ की चिरगांव देहात पेयजल योजना, 54.60 लाख की किल्चवारा खुर्द पेयजल योजना, 57.39 लाख की खलीलपुरा पेयजल योजना, 65.20 करोड़ की रनगुवां पेयजल योजना, 35.56 लाख नदौर पेयजल योजना के अलावा 54.13 करोड़ की लक्ष्मीताल पुनरोद्धार योजनाएं ठप हैं। अधिशासी अभियंता एपी यादव का कहना है कि बजट के अभाव में योजनाएं ठप हैं। बजट आते ही काम शुरू हो जाएगा।
एमडी लिख चुके हैं विलय का पत्र
जल निगम के प्रबंध निदेशक लखनऊ नगर विकास मंत्री को कई बार पत्र लिख चुके हैं कि अगर उनके विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को वेतन देने की स्थिति नहीं है तो उनके विभाग का दूसरे विभाग में विलय कर दिया जाए।