अब बीयू में होगा विश्वस्तरीय ‘एमएस इन डिजीटल फोरेंसिक’ कोर्स
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय देश का दूसरा ऐसा विश्वविद्यालय बनने जा रहा है, जहां विश्वस्तरीय पाठ्यक्रम ‘एमएस इन डिजीटल फोरेंसिक’ संचालित किया जाएगा। देश में अब तक यह कोर्स केवल गुजरात फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी में ही है। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों के लिए रोजगार के असीम अवसर पैदा होंगे।
प्रदेश की 26 स्टेट यूनिवर्सिटी में से सिर्फ बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में ही फोरेंसिक साइंस डिपार्टमेंट है। यहां इसकी शुरुआत सन् 2001 में हुई थी। वर्तमान में डिपार्टमेंट में बीएससी, एमएससी तथा पीजी डिप्लोमा इन फोरेंसिक साइंस कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। लेकिन, अब अगले सत्र से एक नया पाठ्यक्रम ‘एमएस इन डिजीटल फोरेंसिक’ और शुरू करने की तैयारी है। दो साल के इस कोर्स में साइबर क्राइम की सूक्ष्म पड़ताल की विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
पहले सत्र में चालीस छात्रों को प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश दिया जाएगा। बीएससी (फोरेंसिक साइंस) के बाद ही छात्र इस पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में प्रवेश हासिल कर सकेंगे। विश्वविद्यालय के बोर्ड ऑफ स्टडीज ने इसे हरी झंडी दिखा दी है, अब इसके प्रस्ताव को विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की अगली बैठक में रखा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि देश में अभी ‘एमएस इन डिजीटल फोरेंसिक’ कोर्स केवल गुजरात फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी में ही है। लेकिन, अमेरिका के कई विश्वविद्यालयों में इसका संचालन किया जा रहा है।
रोजगार के हैं अपार अवसर
एमएस इन डिजीटल फोरेंसिक के माध्यम से फोरेंसिक छात्रों के लिए रोजगार के अपार अवसर खुलेंगे। साइबर क्राइम में तो इसकी मांग है ही, साथ ही ड्रग क्वालिटी चेक करने के लिए फार्मास्यूटिकल कंपनियों में भी इसकी मांग है। बैंक व कार्पोरेट घरानों भी फोरेंसिक विशेषज्ञों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा किसी भी उत्पाद की क्वालिटी कंट्रोल व मिलावट की जांच के क्षेत्र में भी इसकी खासी उपयोगिता है। यही वजह है कि फोरेंसिक स्टूडेंट्स के लिए रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
- डा. अंकित श्रीवास्तव, समन्वयक - फोरेंसिक साइंस विभाग