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कोरोना के डर से दूसरे शहरों में पढ़ने के लिए नहीं जा रहे हैं छात्र-छात्राएं

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झांसी। कोरोना वायरस के डर के कारण छात्र-छात्राएं पढ़ाई करने के लिए दूसरे शहरों में नहीं जा रहे हैं। ‘घर’ में ही पढ़ाई पर छात्र-छात्राओं का जोर है। इसी का परिणाम है कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में 20 फीसदी प्रवेश बढ़ गए हैं। कई ऐसे कोर्सों में भी छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है, जिनमें रुझान काफी कम रहता था।
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में लगभग 100 कोर्सों में पांच हजार सीटें हैं। अभी तक 3400 प्रवेश हो चुके हैं। एकेटीयू से भरी जाने वाले साढ़े आठ सौ सीटों में अभी छात्रों को सीट आवंटन होना है।हालांकि, 19 अक्तूबर से काउंसलिंग शुरू हो गई है। तीन-चार चरणों में सीट आवंटन होता है। इस दौरान बीयू की अधिकांश सीटें भर जाती हैं। इसके अलावा बीएड की 50 सीटों का आवंटन बाकी है। यह सीटें भी पूरी भर जाती हैं। वहीं, सीधे और प्रवेश परीक्षा वाले कोर्सों में दाखिले हो रहे है। ऐसे में विश्वविद्यालय अधिकारियों का अनुमान है कि एकेटीयू से भरी जाने वाली 800 सीटें, सीधे व प्रवेश परीक्षा वाले कोर्सों से 250 से 300 प्रवेश और होंगे। इस हिसाब से बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कैंपस में साढ़े चार हजार प्रवेश हो जाएंगे, जो कि पिछले साल की तुलना में 20 फीसदी ज्यादा होगा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कोरोना के चलते छात्र-छात्राएं दूरदराज शहरों में जाकर पढ़ाई करने से बच रहे हैं। घर के नजदीक ही शिक्षा ग्रहण करने का रुझान बढ़ा है।
एकेटीयू से इतनी सीटों पर होना आवंटन
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कोर्स सीटें
बीआर्क 20
बीएचएमसीटी 60
बीफार्मा 100
एमसीए 120
एमबीए 120
बीटेक 420
पिछले सालों में प्रवेश की स्थिति
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वर्ष प्रवेश
2015-16 2865
2016-17 2899
2017-18 3183
2018-19 3737
2019-20 3788
बीयू की दो करोड़ बढ़ेगी आय
बीयू के विभिन्न कोर्सों की फीस अलग-अलग है मगर औसत निकाला जाए तो हर छात्र की सालाना फीस 25 हजार रुपये होती है। ऐसे में इस बार 800 छात्रों का प्रवेश बढ़ने से बीयू की आय लगभग दो करोड़ रुपये बढ़ जाएगी।
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यह सही है कि कोविड के कारण नए प्रवेश वाले छात्र बाहर पढ़ने जाने से बच रहे हैं। हालांकि, बीयू के भी कुछ स्पेशलाइज्ड कोर्सों पर इसका असर पड़ा है। यहां भी बाहर से आने वाले छात्र कम हुए हैं। इसके बावजूद पिछले वर्षों की तुलना में इस बार काफी अधिक प्रवेश होंगे। इसके पीछे कोविड के अलाव अन्य कारण भी हैं। इसमें प्रवेश प्रक्रिया जल्दी शुरू होने के अलावा एकेडमिक माहौल में और सुधार होना भी है। - प्रो. जेवी वैशम्पायन, कुलपति, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय।
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