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बीयू : समितियों की जांच फाइलों में सिमटी

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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में खरीद-फरोख्त से लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों की जांच के लिए पिछले दो साल में ही छह से ज्यादा कमेटियों का गठन किया जा चुका है। खास बात ये है कि ज्यादातर जांच ठंडे बस्ते में हैं। गठित जांच कमेटियां भी फाइलों में ही सिमटकर रह गई हैं।

बीयू से बर्खास्त किए गए जेई अम्बरीश गौतम की अपील पर भी करीब चार साल से जांच चल रही थी। संदिग्ध हालात में उनकी मौत के बाद बीयू में जांच में लेटलतीफी के मामले फिर चर्चा में आ गए हैं। कई मामलों में गठित समितियों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। इन समितियों की बैठक कब होती है और एक से दो साल बीतने के बाद भी कमेटियां जांच पूरी क्यों नहीं कर पा रही हैं। इस पर बीयू प्रशासन भी नहीं पूछता है। बल्कि, अधिकतर कमेटियों के गठन के लिए निकाले गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि जल्द से जल्द मामले की जांच पूरी करके आख्या उपलब्ध कराएं।
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जिन कमेटियों की जांच लंबे समय से लंबित है, उनके प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। पूछा जाएगा कि अब तक जांच कहां तक पहुंची है। कितनी बैठकें हो चुकी हैं। - राजबहादुर, कुलसचिव, बीयू।
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