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बुंविवि की एक और फर्जी मार्कशीट पकड़ी

Thu, 06 Aug 2015 12:48 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट बनवाने का एक और मामला सामने आया है। बुधवार को बीयू की फर्जी मार्कशीट की डुप्लीकेट कॉपी (डीसी) निकलवाने आया एक छात्र दबोच लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र को पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।
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मूलरूप से लजहत नगर, जालंधर शहर का रहने वाला एक छात्र नोएडा में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है। छात्र के मुताबिक करीब एक साल पूर्व उसने अपने एक दोस्त से ग्रेजुएशन करने को लेकर चर्चा की थी, दोस्त ने कॉलेज में प्रवेश लिए बगैर मार्कशीट बनवाने की बात कही। इसके एवज में उसने तीस हजार रुपये की मांग की। आरोपी छात्र ने बताया कि हाल ही में उसका दोस्त बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की फर्जी मार्कशीट की फोटोकॉपी लेकर आया और रुपयों की मांग करने लगा। इस पर उसने एतराज जताया और मार्कशीट की डुप्लीकेट कॉपी निकलवाने की बात कही। बुधवार को छात्र मार्कशीट की डुप्लीकेट कॉपी निकलवाने आया। उसने मार्कशीट खो जाने का प्रार्थनापत्र देते हुए कॉपी निकलवाने की मांग की। एप्लीकेशन के साथ ही उसने अखबार में निकाले गए मार्कशीट खो जाने के विज्ञापन की फोटोकॉपी भी लगाई। गोपनीय विभाग में कर्मचारियों ने जैसे ही फोटोकॉपी देखी तो उसके फर्जी होने की पुष्टि हो गई।
 दरअसल, छात्र द्वारा दिखाई गई प्रथम व द्वितीय वर्ष की मार्कशीट की फोटोकॉपी में पास्ड इन फर्स्ट डिवीजन लिखा हुआ था, जबकि बीयू द्वारा जारी की जाने वाली अंकतालिका में ऐसा नहीं होता है। इसके बाद छात्र को कर्मचारियों ने कमरे के अंदर बुलाया और उससे मार्कशीट की फोटोकॉपी फर्जी होने की बात कहते हुए पूछताछ शुरू की। इस दौरान कर्मचारियों से छात्र की तीखी बहस भी हुई। इसके बाद सिक्योरिटी गार्डों को बुलाकर उसे विजिटर रूम में बैठा दिया गया। कुलसचिव अखिलेश चंद्र के अनुसार छात्र के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश देकर उसको पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। उधर, चौकी इंचार्ज के अनुसार उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है।
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गले नहीं उतर रही छात्र द्वारा बताई गई कहानी
छात्र खुद को भले ही निर्दोष बता रहा हो लेकिन जो कहानी बयां कर रहा है वह किसी के गले नहीं उतर रही है। आरोपी छात्र का कहना है कि दोस्त ने उसे मार्कशीट की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई थी। अगर ऐसा था तो उसने अखबार में मार्कशीट खोने का विज्ञापन क्यों निकलवाया। वहीं, यह जानते हुए भी कि कहीं प्रवेश लिए बगैर अंकतालिका नहीं बन सकती है, फिर भी उसने मित्र द्वारा दी गई मार्कशीट पर भरोसा कर लिया। इससे यह साफ पता चलता है कि फर्जी मार्कशीट बनवाने में उसकी भी भूमिका रही है।
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