बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी में गठबंधन होने के बाद बसपा नेताओं को अब झांसी लोकसभा सीट अपने खाते में आने की उम्मीद है। ऐसे में पार्टी झांसी-ललितपुर क्षेत्र में ब्राह्मण के अलावा कुशवाहा और साहुओं की संख्या को देखते हुए इन जातियों के नेता को भी टिकट देने का दांव खेल सकती है। इन दोनों ही जातियों के एक- एक नेता टिकट के लिए काफी सक्रिय हैं।
लोकसभा चुनाव को लेकर बसपा और सपा के बीच शीर्ष नेतृत्व ने गठबंधन कर लिया है। प्रदेश की 80 सीटों में से बसपा और सपा 37- 37 पर चुनाव लड़ेंगी। रायबरेली और अमेठी सीट कांग्रेस के लिए छोड़ी गई है। जबकि बाकी चार अन्य दलों के लिए। बसपा नेताओं में चर्चा है कि 15 जनवरी को पार्टी सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन के बाद लोकसभा प्रत्याशियों की घोषणा हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो सपा अपने हिस्से में 37 ऐसी सीटों को रखना चाहती है, जहां उसको कई बार जीत मिल चुकी है या गठबंधन में जीत आसानी से मिल जाएगी। बुंदेलखंड के बसपा नेताओं ने पार्टी सुप्रीमो के समक्ष अपनी राय रखी है कि अगर झांसी- ललितपुर सीट उनके हिस्से में आती है तो उनकी जीत पक्की हो सकती है। दूसरा, सपा के सबसे मजबूत दावेदार पूर्व सांसद डा. चंद्रपाल सिंह यादव वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। इससे उनके चुनाव लड़ने की उम्मीद कम है।
इस कारण पार्टी ने लोकसभा चुनाव में वर्तमान हालत देखते हुए जातीय समीकरण बैठाना शुरू कर दिए हैं। झांसी-ललितपुर संसदीय क्षेत्र में ब्राह्मणों के बाद कुशवाहा जाति के लोगों की ही सबसे ज्यादा संख्या हैं। इसके बाद अहिरवार, मुस्लिम व साहू का नंबर आता है। चर्चा है कि पार्टी ब्राह्मण, कुशवाहा और साहू में से किसी एक जाति के अपने नेता पर दांव खेल सकती है। टिकट मिलने की पूरी उम्मीद देख इन नेताओं ने क्षेत्र में संपर्क और दिल्ली के चक्कर लगाना शुरू कर दिए हैं। टिकट की कतार में जुगल किशोर कुशवाहा, कैलाश साहू, कृष्णपाल सिंह राजपूत आदि लगे हुए हैं।
हाईकमान का आदेश होगा तभी लडू़ंगी चुनाव- अनुराधा
लोकसभा चुनाव का टिकट मांगने पर बसपा नेत्री अनुराधा शर्मा का कहना है कि अगर पार्टी हाईकमान का आदेश मिलता है तो वह चुनाव लड़ेंगी। अन्यथा अभी कोई फैसला नहीं लिया है। मालूम हो कि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उनको प्रत्याशी बनाया था। उनको ढाई लाख से अधिक वोट मिले थे।