अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में पुस्तक मेले के समापन समारोह में पूर्व शिक्षा मंत्री रवींद्र शुक्ल ने कहा कि कोई कवि बनता नहीं है, बल्कि वे अवतरित होते हैं। कविता लिखी नहीं जाती, कविता कही जाती है। युवाओं को लेखन से पहले अध्ययन करना चाहिए। स्वाध्याय बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि समाज से साहित्य निकलता है। साहित्य को लिखते समय लोक कल्याण और राष्ट्रवाद को ध्यान में रखिए। मशहूर साहित्यकार गोविंद मिश्रा ने कहा कि लेखन एक साधना के समान है। आपको ढेर सारी किताबें जरूर पढ़नी चाहिए। समाज से प्रेरणा लीजिए। समाज में जो भी घटित हो रहा है, उसे अपने शब्द दीजिए। ढेर सारी किताबें पढ़ते रहिए। पूर्व आईएएस प्रमोद कुमार अग्रवाल की ओर से संपादित बुंदेलखंड के कवि किताब का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में 75 से अधिक कवियों ने अपनी कृतियां दी हैं।
इनमें बुंदेलखंड से लेकर शृंगार, ओज, परंपरा, संस्कृति, दर्शन पर कविताएं लिखी हैं। प्रो. मुन्ना तिवारी ने कहा कि पिछले सात दिनों में 50 से अधिक साहित्यकार इस पुस्तक मेला का हिस्सा बनने पहुंचे। प्रयागराज से आए कवि विनम्र सेन सिंह की रचनाओं ने श्रोताओं का दिल जीत लिया। इस अवसर पर प्रो. पुनीत बिसारिया, डॉ. अचला पांडेय, डॉ. श्रीहरि त्रिपाठी, डॉ. नवीनचंद्र पटेल, डॉ. रेनू, गरिमा, अजय तिवारी, रिचा, रजनीश, आकांक्षा सिंह, मनीष मंडल, विशाल आदि मौजूद रहे।