झांसी। अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में रविवार को जिला अस्पताल में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 36 लोगों ने एक-एक यूनिट रक्तदान किया। इसके अलावा तमाम लोग ऐसे भी रहे, जो शिविर में रक्तदान करने पहुंचे, परंतु स्वास्थ्य कारणों से उनका रक्त नहीं लिया गया। शिविर के दौरान सभी रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
जिला अस्पताल के हृदय रोग निदान केंद्र में शिविर का शुभारंभ सुबह आठ बजे हुआ। त्योहारी सीजन और रविवार का अवकाश होने के बाद भी शिविर शुरू होते ही यहां रक्तदान के लिए लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। रक्तदान करने आए लोगों से पहले एक फार्म भरवाया गया और उसके बाद अस्पताल की टीम ने उनका चिकित्सीय परीक्षण किया। सब कुछ सही पाए जाने पर उन्हें रक्तदान की स्वीकृति दी गई।
जबकि, इससे पूर्व शिविर का शुभारंभ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अपर निदेशक डा. रेखा रानी, मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुरेश सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक डा. बी के गुप्ता, ब्लड बैंक प्रभारी डा. एम एस राजपूत और डा. अतुल गुप्ता ने किया। इस अवसर पर चिकित्सकों ने कहा कि रक्तदान में वह शक्ति है, जो जीवन को बचा सकती है। यही वजह है कि रक्तदान को महादान माना जाता है। रक्त को कृत्रिम रूप से बनाया नहीं जा सकता है, यह एक व्यक्ति द्वारा दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति को दिया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने रक्तदान से जुड़ी भावना को जन-जन तक पहुंचाने की अपील करते हुए अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयास की सराहना की।
इनका मिला सहयोग
स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में जिला अस्पताल के फिजिशियन डा. डी एस गुप्ता समेत ब्लड बैंक के आर एस चंदेल, दिनेश कुमार, प्रशांत दीप गुप्ता, विनोद, दिलीप अवस्थी, दसरथ और राहुल वर्मा का विशेष सहयोग रहा।
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... ताकि हर मां को मिले आसानी से खून
प्रेमनगर क्षेत्र के राजीव नगर निवासी नरेंद्र कुमार नीलू अपनी पत्नी जूनियर हाईस्कूल सकरार की प्रधानाध्यापिका मीरा वर्मा के साथ रक्तदान करने पहुंचे। नरेंद्र कुमार ने बताया कि तीस साल पहले उनकी मां बीमार थीं, उन्हें खून की आवश्यकता थी, जो आसानी से नहीं मिल पाया था। तभी सह वह हर तीन महीने बाद रक्तदान करते हैं। उन्हें याद भी नहीं है कि अब तक वह कितने बार खून दे चुके हैं। रविवार को पहली बार उनकी पत्नी मीरा वर्मा ने भी रक्तदान किया।
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16 यूनिट खून का है कर्ज
सर्व नगर निवासी डा. ममता दासानी रक्तदान करने शिविर में पहुंची। उन्होंने बताया कि उनकी बहन की बीमारी में लोगों ने 16 यूनिट रक्तदान किया था, जिसे वह अपने ऊपर कर्ज मानती हैं। अब तक आठ बार रक्तदान कर आधा कर्ज चुका चुकी हैं, आठ यूनिट और रक्तदान करना है। हालांकि, शिविर में डा. ममता का रक्त लिया नहीं गया। उनका ब्लड ग्रुप ‘ओ नेगेटिव’ है। ब्लड प्रभारी डा. एम एस राजपूत ने उनसे कहा कि जब भी किसी मरीज को आवश्यकता होगी, उन्हें रक्तदान के लिए बुला लिया जाएगा। डा. राजपूत ने बताया कि ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप की कम ही आवश्यकता पड़ती है। यह ग्रुप कम ही लोगों में पाया जाता है। जब किसी को जरूरत होगी, डा. ममता को बुला लिया जाएगा। पहले भी वह रक्तदान कर चुकी हैं।
रक्तदान के ये लाभ बताए
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- ब्लड प्रेशर नियंत्रित होता है
- कैलोरी खर्च होती है, तो शरीर की चर्बी घटती है
- ह्रदय रोग की 33 फीसदी आशंका कम हो जाती
- शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है
- रक्तदान करने से नई कोशिकाओं का सृजन होता है।
- नियमित अंतराल में रक्तदान से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती