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ब्लॉक प्रमुखों को लौटाए उनके छीने गए वित्तीय अधिकार

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झांसी। ब्लॉक प्रमुखों के वित्तीय अधिकार सीमित करने का फैसला सरकार को करीब एक माह के भीतर ही वापस लेना पड़ गया। पंचायत अधिनियम के उलट शासनादेश जारी करने से शासन की काफी किरकिरी हुई। इस वजह से आखिरकार उसे बैकफुट पर आने को मजबूर होना पड़ा।
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पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार ने 16 जून को एक शासनादेश जारी किया। इसके जरिए प्रदेश भर में ब्लॉक प्रमुखों के अधिकार सीमित कर दिए गए। इसके पहले तक सामान्य विकास निधि का संचालन ब्लॉक प्रमुख बीडीओ के माध्यम से करते थे लेकिन, शासनादेश में ब्लॉक प्रमुख को बाहर करते हुए उनकी जगह एडीओ को शामिल कर दिया गया। ब्लॉक प्रमुखों के अधिकार सिर्फ संबंधित फाइल पर अनुमोदन करने तक सीमित कर दिए गए। इसके पहले 2016 में ब्लॉक प्रमुखों से केंद्रीय वित्त आयोग के अधिकार भी वापस ले लिए गए थे। प्रस्तावित व्यवस्था में ब्लॉक स्तर पर राज्य वित्त आयोग एवं सामान्य विकास निधि से आई राशि के खाते का संचालन सहायक विकास अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी मिलकर करेंगे लेकिन, शासनादेश जारी होते ही विरोध आरंभ हो गया।
जानकारों का कहना है पंचायती राज अधिनियम की धारा 101 में साफ तौर पर ब्लॉक प्रमुखों के वित्तीय अधिकार के बारे में लिखा गया है। अधिनियम के मुताबिक क्षेत्र पंचायत निधि से धन निकासी एवं वितरण ब्लॉक प्रमुख एवं खंड विकास अधिकारी साझे तौर पर करेंगे। ब्लॉक प्रमुखों का कहना है कि सरकार जानबूझकर इस प्रावधान से खिलवाड़ कर रही है। ब्लॉक प्रमुखों ने इस नई व्यवस्था का विरोध शुरू कर दिया। संवैधानिक व्यवस्था के उलट शासनादेश जारी करने को लेकर शासन की काफी किरकिरी हुई। विरोध बढ़ता देख आखिरकार अफसरों को गलती का अहसास हुआ। पिछले दिनों पंचायती राज विभाग ने फिर नए शासनादेश के जरिए पुरानी व्यवस्था बहाल कर दी। इसके मुताबिक पहले की तरह ब्लॉक प्रमुख ही सामान्य विकास निधि संचालित करेंगे। डीपीआरओ जगदीश राम के मुताबिक इस संबंध में शासनादेश भी आ गया है।
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