यूपी कृषि अनुसंधान विकास परिषद के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता।
- फोटो : REPORTERS
‘बुंदेलखंड’ नाम से पेटेंट कराई जा रही क्षेत्र की काली बकरी
झांसी। बुंदेलखंड की काली बकरी अब पेटेंट कराई जा रही है। इसके बाद विश्व भर में इसकी खास पहचान होगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की खुशहाली के लिए जल्द ही कृषि निर्यात नीति लागू करने जा रही है। इस नीति के तहत किसान अपने फल, सब्जी व अनाज को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक में जाकर बेच सकेंगे। इसमें किसान को सब्सिडी भी मिलेगी और अंतरराष्ट्रीय बाजार का भाव भी मिलेगा। यह बात बृहस्पतिवार को दो दिवसीय बुंदेलखंड के दौरे पर आए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान विकास परिषद के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता ने पत्रकारों से कही।
उन्होंने कहा कि नई नीति में किसानों को मंडी जाने की भी जरूरत नहीं रहेगी। सभी मंडियों को ऑनलाइन किया जा रहा है। इसके बाद किसान दो प्रतिशत मंडी शुल्क ऑनलाइन जमा करके देश की किसी भी मंडी में जाकर अनाज बेच सकेंगे। वह अपने माल को बिना रोक टोक कहीं भी ले जा सकते हैं। बुंदेलखंड के किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने के लिए केंद्र व प्रदेश की सरकार संभावनाएं तलाशने में लगी हुई हैं। यहां पर जैविक खेती और पशु पालन से आय बढ़ाई जा सकती है। प्रदेश में सबसे बड़े आकार के खेत बुंदेलखंड में ही मिलते हैं, इसलिए यहां जैविक खेती करना आसान है। भदावरी भैंसों की नस्ल के संवर्धन और संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि यह भैंसें दोगुना दूध दे सकें। बुंदेलखंड में काली बकरी ज्यादा संख्या में हैं, इनको बुंदेलखंड नाम से पेटेंट कराया जा रहा है। इसके बाद बकरी की यह नस्ल पूरे विश्व में बुंदेलखंड के नाम से जानी जाएगी। इसके मांस का कारोबार भी किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि जिन किसानों की खेती को नील गाय नुकसान पहुंचा रही हैं, वह उसको मार सकते हैं। यह अपराध नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान ग्रासलैंड, भरारी फार्म व कृषि वानिकी के वैज्ञानिकों से मुलाकात करेंगे। साथ ही, सिंचाई अधिकारियों से मिलकर केन बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य योजनाओं की जानकारी लेंगे। इस मौके पर नरेंद्र सराफ, आनंद गुप्ता, चंद्रपाल सिंह, अरुण गुप्ता, रमाकांत राजपूत मौजूद रहे।