झांसी। जिले में सफेद दूध का काला कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। खाद्य प्रशासन विभाग की ओर से की गई छापेमारी के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं। इस साल जनवरी तक विभाग ने 169 नमूने जांच के लिए भेजे हैं, जिसमें से 87 फेल हो चुके हैं। कुछ की रिपोर्ट अभी आना बाकी है।
शहर में जगह-जगह पर दूध की दुकानें खुली हैं। पैकेट वाले दूध की तुलना में इन दुकानों का दूध सस्ता पड़ने की वजह से लोग खूब खरीदते भी हैं। मगर ग्राहकों को ये पता ही नहीं होता कि सस्ते के चक्कर में वो मिलावट वाला दूध खरीद रहे हैं, क्योंकि कई दुकानों पर फैट निकालकर दूध बेचा जा रहा है। इस वजह से दूध में मौजूद सेहत सुधारने से जुड़े जरूरी तत्व जैसे कैल्शियम, मिनिरल, कैलोरी की मात्रा कम हो जाती है। इस दूध को पीने से बच्चों की सेहत नहीं बनती है। उल्टा स्वास्थ्य को नुकसान उठाना पड़ सकता है। क्रीम निकालकर दूध बेचना गैर कानूनी भी है। हालांकि, कुछ कंपनियों भी टोंड दूध बेचती हैं लेकिन वो इस संबंध में बाकायदा पैकिंग पर लिखती हैं। ताकि, ग्राहक को पता होता है कि वह जो दूध खरीद रहा है, उसमें कितना फैट है। वहीं, अब होली के त्योहार के मद्देनजर मिलावटखोर बड़े पैमाने पर नकली दूध बाजार में खपाने की तैयारी में हैं।
दूध का ये है मानक
- गाय के 100 मिलीलीटर दूध में 3.5 फीसदी फैट, 8.5 प्रतिशत पाउडर होना चाहिए।
- भैंस के 100 मिलीलीटर दूध में 6 फीसदी फैट, 9 प्रतिशत पाउडर होना चाहिए।
- मिक्स 100 मिलीलीटर दूध में 4.5 प्रतिशत फैट, 8.5 फीसदी पाउडर होना चाहिए।
विभाग की तरफ से लगातार छापेमारी करके दूध समेत सभी खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाते हैं। होली के त्योहार के मद्देनजर छापेमारी और तेज की जाएगी। - हरीमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त, खाद्य।