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भाजपा: सक्रियों पर भारी ‘पैराशूट’ पदाधिकारी, कमेटी में आधी भी नहीं ‘आधी आबादी’, कार्यकर्ता जता रहे विरोध

Sat, 28 Mar 2026 12:36 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क

सार

महानगर कमेटी में ‘पैराशूट’ पदाधिकारी को लेकर सबसे अधिक चर्चा है। नेताओं का कहना है कि संबंधित व्यक्ति ने पहले कभी संगठन में कोई पद नहीं संभाला, ऐसे में सीधे कार्यसमिति में स्थान मिलना सवाल खड़े करता है। 
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बीजेपी।
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विस्तार
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भाजपा की ओर से घोषित महानगर कमेटी अब सवालों के घेरे में है। विरोध किसी विपक्षी दल की ओर से नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर से ही उठ रहा है। हालांकि अधिकांश कार्यकर्ता खुलकर सामने नहीं आ रहे, लेकिन दबी जुबान में असंतोष जाहिर किया जा रहा है। सबसे अधिक चर्चा ‘पैराशूट’ पदाधिकारी को लेकर है। साथ ही प्रदेश संगठन द्वारा तय ‘आधी आबादी’ (महिला प्रतिनिधित्व) का मानक भी पूरा नहीं होने के आरोप लग रहे हैं।
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बीते 21 मार्च की देर रात कमेटी की घोषणा के बाद से ही सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने लगी। कुछ कार्यकर्ताओं ने सीधे पोस्ट कर विरोध जताया, जबकि कई ने पदाधिकारियों और अन्य कार्यकर्ताओं की पोस्ट पर टिप्पणी कर असंतोष व्यक्त किया।
पार्टी ने कार्यकारिणी गठन के लिए कुछ स्पष्ट मानक तय किए थे। इनमें 2019 और 2024 के सक्रिय सदस्य होना, कम से कम सात महिलाओं और दो अनुसूचित जाति/जनजाति प्रतिनिधियों को शामिल करना, सभी विधानसभा क्षेत्रों व मंडलों का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और अनुभवी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना शामिल था।
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इसके बावजूद गठित महानगर कमेटी में कुछ नामों ने सभी को चौंका दिया। ‘पैराशूट’ पदाधिकारी को लेकर सबसे अधिक चर्चा है। नाम न छापने की शर्त पर कई नेताओं का कहना है कि संबंधित व्यक्ति ने पहले कभी संगठन में कोई पद नहीं संभाला, ऐसे में सीधे कार्यसमिति में स्थान मिलना सवाल खड़े करता है। इससे लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं में निराशा है। महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी असंतोष है। कार्यसमिति में केवल तीन महिला पदाधिकारियों को जगह मिली है, जो तय मानकों से काफी कम है। इसे लेकर महिला कार्यकर्ता भी सोशल मीडिया पर नाराजगी जता रही हैं।


उम्र सीमा पर भी उठे सवाल
कार्यकारिणी गठन के लिए 30 से 50 वर्ष आयु सीमा का मानक तय किया गया था, लेकिन महानगर कमेटी में चार पदाधिकारी 50 वर्ष से अधिक आयु के बताए जा रहे हैं। यही स्थिति ग्रामीण कार्यकारिणी में भी देखने को मिल रही है, जहां कुछ पदाधिकारी निर्धारित आयु सीमा से ऊपर हैं।


सीमित पदों के कारण सभी को समायोजित करना संभव नहीं होता। अभी 44 प्रकोष्ठों का गठन होना है, जिनमें जनपद स्तर पर एक संयोजक और दो सह-संयोजक बनाए जाएंगे। इसके अलावा सात मोर्चों और उनकी टीमों का भी गठन होना है, जिनमें सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी। - अशोक राजपूत, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, कानपुर-बुंदेलखंड, भाजपा।
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