झांसी। भारतीय जनता पार्टी में बबीना विधानसभा क्षेत्र के टिकट के लिए अब जंग और तेज हो गई है। इसमें हरगोविंद कुशवाहा और नत्थू कुशवाहा की पत्नी चांदनी भी शामिल हो गई हैं।
इस बार भाजपा ने बुंदेलखंड की 19 सीटों में 15 पर जीत का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए दूसरे दलों को छोड़कर आ रहे नेताओं को अधिक तरजीह दे जा रही है। इस कारण हर सीट पर दावेदारों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसमें बबीना विधानसभा सीट भी शामिल थी।
अभी तक इस सीट के प्रमुख दावेदारों में श्याम सुंदर सिंह, राजीव सिंह पारीछा और चंद्रप्रकाश मिश्रा ही शामिल थे। श्याम सुंदर सिंह के सपा प्रत्याशी बनने पर दावेदार दो रह गए। इनमें चंद्रप्रकाश मिश्रा वर्ष 1988 से विद्यार्थी परिषद से जुड़े हुए हैं। विद्यार्थी परिषद में अलग- अलग पदों पर काम करने के बाद वह भाजपा में कार्यकर्ता की भूमिका में आ गए। इस समय वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में एक हैं। राजीव सिंह पारीछा चार साल पहले ही पार्टी आए। मगर, इस अवधि में ही उन्होंने पार्टी में एक अलग पहचान बना ली है। वर्तमान में उनके पास प्रदेश कार्यसमिति सदस्य का दायित्व है।
टिकट मांगने वालों में राजेंद्र गुप्ता, मोहन सिंह यादव, गोविंद सिंह यादव के भी नाम शामिल है। मगर पिछले तीन दिन में जो हुआ उससे बबीना विधानसभा में दो बड़े दावेदार सामने आ गए हैं। इनमें राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के बुंदेलखंड प्रभारी बनाए गए नत्थू कुशवाहा ने पार्टी की ओर से अपनी पत्नी चांदनी कुशवाहा को दावेदार बनाया है। चूंकि, केंद्र में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी का भाजपा से गठबंधन है तो बुंदेलखंड में कुछ सीटें जरूर मांगेगा। हो सकता है कि बबीना सीट राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के खाते में चली जाए। इसी उम्मीद से नत्थू कुशवाहा ने अपनी पत्नी को दावेदार बनाया है।
वहीं, झांसी में छह और सात अगस्त को भाजपा कार्यसमिति बैठक के दौरान जिस तरह गुपचुप तरीके से प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने हरगोविंद कुशवाहा से उनके घर जाकर व्यक्तिगत मुलाकात की और फिर वह बीस दिन बाद ही पार्टी में शामिल हो गए। चर्चा है कि बबीना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने के आश्वासन पर उन्होंने भाजपा ज्वाइन की। उनके दामाद अमर पाल भी भाजपा के प्रदेश मंत्री है। हालांकि, हरगोविंद कुशवाहा ने खुद इस बात से इंकार किया है कि वह बबीना विधानसभा क्षेत्र चुनाव लड़ने के उद्देश्य से पार्टी में शामिल हुए है। मगर, राजनीति में कब, क्या हो जाए? यह कोई अचरज नहीं है।