झांसी। घरों के बाहर बिजली के मीटर लगवाना बिजली विभाग के लिए फायदे का सौदा साबित हुआ है। एक तरफ तो बिजली चोरी पर अंकुश लगा है तो दूसरी तरफ राजस्व भी बढ़ा है। उपभोक्ता नए मीटरों में कारस्तानी नहीं कर पा रहे हैं। किसी न किसी कारण से जो भी मीटर अब जांच के लिए प्रयोगशाला आ रहे हैं, उनमें अब पांच फीसदी में ही कारस्तानी निकल रही है। एक साल पहले तक सौ में से पचास मीटरों में गड़बड़ी मिलती थी।
महानगर में 1.14 लाख बिजली उपभोक्ता हैं। इसमें सात हजार ऐसे कनेक्शन हैं, जिनका स्थायी कनेक्शन कटे होने के बाद भी वे विभाग के रिकार्ड में चल रहे हैं। पिछले कुछ सालों से चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान 99 फीसदी से अधिक मैनुअल मीटरों को बदलकर एलएंडटी और लैंडीस कंपनी के डिजिटल मीटर घर के बाहर लगाए जा चुके हैं। इससे फायदा यह हुआ कि बिजली चोरी करना मुश्किल हो गया। पहले 100 में से 50 मीटर गड़बड़ मिलते थे लेकिन अब बमुश्किल 100 में पांच मामले ही सामने आ रहे हैं। पिछले चार साल में 20 हजार मीटरों में गडबड़ी पकड़ी गई, जिससे विभाग को 30 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ। इस संबंध में प्रभारी अधिशासी अभियंता (मीटर परीक्षणशाला) शोभित दीक्षित ने बताया कि अब जो भी मीटर जांच के लिए आ रहे हैं, उनमें पांच फीसदी में ही गड़बड़ी मिल रही है।
मीटर बाईपास चोरी के पकड़े जा रहे सबसे ज्यादा मामले
जब से विभाग ने बिजली मीटरों को घर से बाहर लगाया है। तब से खुराफाती उपभोक्ता मीटरों में छेड़छाड़ नहीं कर पा रहे हैं। चेकिंग के दौरान अब सबसे अधिक मीटर से पहले केबल में कट लगाकर चोरी करने के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले एक साल में मीटर से पहले केबल में कट लगाकर चोरी के 1837 मामले पकड़े गए।