- क्रय केंद्रों पर 71 दिन में सिर्फ 24 हजार एमटी हुई खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। किसानों से गेहूं खरीदने के लिए सरकारी तंत्र द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि जिले में 71 दिन में महज 24 हजार एमटी गेहूं की खरीद हुई है। अब 36 दिन में 74 हजार एमटी खरीद करना चुनौती बन रहा है। अफसरों ने जनप्रतिनिधियों के माध्यम से भी किसानों को सरकारी केेंद्र पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित कराया, लेकिन इसका कोई खास लाभ नहीं मिला।
प्रदेश सरकार ने जिले में एक मार्च से 15 जून तक 99 हजार एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। शुरु में क्रय केंद्रों पर गेहूं की खरीद धीमी रही जबकि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के जिलों में जमकर गेहूं खरीद हुई। झांसी में गेहूं 2295 रुपये प्रति क्विंटल और पड़ोसी राज्य में 2400 प्रति क्विंटल तक बिका। हालात देख अफसरों ने जनप्रतिनिधियों (ग्राम प्रधान, पंचायत सदस्य) से संपर्क साधा। प्रतिनिधियों ने किसानों को क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने के लिए प्रेरित भी किया। मगर इसका कुछ खास असर नहीं दिखा। जिले में अब तक 24613 एमटी गेहूं की खरीद हो सकी है। ऐसे में 15 जून तक 74387 एमटी गेहूं की खरीद करना चुनौती है।
-
कोरोना काल में हुई थी रिकॉर्ड खरीद
कोरोना काल में जिले में रिकार्ड 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। इससे साफ है कि जिले में गेहूं की पैदावार काफी अच्छी है। कोरोना काल में जितनी खरीद हुई, उतनी कई वर्ष से नहीं हुई है।
-
चना खरीद का नहीं खुला खाता
जिले में अभी तक किसी भी केंद्र पर चना की खरीद नहीं हुई है। जबकि गत वर्ष 3215 किसानों से 6972 मीट्रिक टन खरीद हुई थी। वहीं मसूर की अभी तक 11317 मीट्रिक टन रिकॉर्ड खरीद हो चुकी है। गत वर्ष 6183 मीट्रिक टन की खरीद हुई थी। वहीं, सरसों की 8516 मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है वहीं गत वर्ष 13987 एमटी खरीद हुई थी।
-
वर्जन
कोरोना काल में 80 हजार मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीद हुई थी। इस बार गेहूं की खरीद बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। कम खरीद की वजह पड़ोसी राज्य में कीमत ज्यादा होना है। 15 जून तक लक्ष्य पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों के माध्यम से किसानों को प्रेरित करके खरीद बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
- अशोक कुमार यादव, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता