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BHEL: स्वदेशी तकनीक पर बन रहीं वंदे भारत की बोगियां, अधिकतम 176 किमी की गति से दौड़ने पर नहीं लगेगा झटका

Sun, 11 Jan 2026 07:47 AM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

भेल अफसरों का कहना है कि ट्रेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी बोगी होती है। इनको बनाने का जिम्मा भेल को दिया गया है। यहां 16 कोच की कुल 80 वंदे भारत के लिए बोगियां बनाई जा रही हैं।
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वंदे भारत ट्रेन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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भेल में स्वदेशी तकनीक के सहारे देश की पहली स्लीपर वंदे भारत की बोगियां बनाई जा रही हैं। इनको 176 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इनको इस तरह से बनाया जा रहा कि अधिकतम रफ्तार में भी यात्रियों को इसका अहसास नहीं हो। सफर के दौरान यात्रियों को झटके नहीं लगेंगे। भेल अफसरों का कहना है कि बोगियां बनाकर इनको टीटागढ़ (बंगाल) भेज दिया जाएगा। वंदे भारत के कोच वहां तैयार होंगे।
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अभी पूरे देश में चेयरकार वंदे भारत चलाई जा रही है। अगले वर्ष से सेमी हाई स्पीड स्लीपर वंदे भारत चलाने की तैयारी है। मौजूदा वंदे भारत ट्रेनें दिन के समय चलती हैं, वहीं स्लीपर संस्करण को रात की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है। भेल अफसरों का कहना है कि ट्रेन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उसकी बोगी होती है। इनको बनाने का जिम्मा भेल को दिया गया है। यहां 16 कोच की कुल 80 वंदे भारत के लिए बोगियां बनाई जा रही हैं। इनको पूरी तरह स्वदेशी तकनीकी के सहारे बनाया जा रहा है। खास तौर से अंडर स्लंग ट्रैक्शन कन्वर्टर का उपयोग किया गया है। इसे बोगी के नीचे लगाया गया है। इससे ट्रेन के अंदर अधिक जगह मिलने के साथ वजन का संतुलन बेहतर बनाने में मदद मिली। ये कन्वर्टर बिजली को नियंत्रित करके मोटर तक पहुंचाते हैं। इससे ट्रेन को आवश्यक गति और शक्ति मिलती है। विशेष तकनीकी के इस्तेमाल की मदद से ट्रेन को 176 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ाया जा सकेगा। इतनी रफ्तार में भी ट्रेन में बैठे यात्रियों को पटरी के झटके महसूस नहीं होंगे। अपर महाप्रबंधक अंकुर जैन ने बताया कि भेल में बोगियां स्वदेशी तकनीकी से बनाई जा रही हैं। बोगियों का निर्माण होने के बाद इनको टीटागढ़ भेज दिया जाएगा। वहां वंदे भारत ट्रेन को अंतिम रूप मिलेगा।
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