रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों के एनाउंसमेंट के बीच विज्ञापन प्रसारित कर आमदनी बढ़ाने की योजना बोर्ड की गाइड लाइन में फंस गई है। रेलवे के वाणिज्य विभाग की इस योजना को मंडल स्तर पर शुरू करने के लिए दो बार टेंडर निकाले गए, मगर एक बार ठेकेदार ने कार्य शुरू करने में रुचि नहीं दिखाई तो दूसरी बार कोई ठेका लेने नहीं आया।
अभी तक रेलवे प्लेटफार्म, परिसर व ट्रेनों में विज्ञापन लगवा कर राजस्व प्राप्त कर रहा है। लेकिन, दो साल पहले झांसी रेल मंडल में विज्ञापन के जरिये पैसा कमाने का नया तरीका अपनाने की योजना बनाई गई थी। योजना के हिसाब से एनाउंसमेंट के साथ विज्ञापन प्रसारित किया जाना था। इससे रेलवे को राजस्व तो मिलता ही और यात्रियों का मनोरंजन भी होता है। इसमें जागरूक करने वाले कई विज्ञापन भी शामिल किए जाने थे। इसके लिए मंडल के झांसी, ग्वालियर समेत 14 स्टेशनों के लिए एक साथ टेंडर निकाला गया था। यह टेंडर दक्षिण भारत के ठेकेदार वेणु गोपाल को मिला था। उन्होंने प्रथम छह माह की लाइसेंस फीस 3.86 लाख रुपये भी जमा कर दिए थे। मगर, इसके बाद वे काम शुरू करने नहीं आए। रेलवे ने उनको कई नोटिस भी जारी किए पर उन्होंने जवाब नहीं दिया। छह माह बाद उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। बाद में टेंडर मांगने पर किसी ने आवेदन नहीं किया। अब रेलवे बोर्ड ने मार्च 2017 तक सभी टेंडर निकालने का अधिकार अपने पास ले लिया है, इस कारण यह योजना ठंडे बस्ते में पड़ी है।
गाइड लाइन मिलने पर शुरू होगा काम
इस योजना के लिए नए सिरे से टेंडर निकाला जाना था। मगर, अभी टेंडर निकालने का अधिकार रेलवे बोर्ड के पास है। बोर्ड से नई गाइड लाइन आने पर ही अब इस योजना पर काम शुरू हो सकेगा।
- मनोज कुमार सिंह, पीआरओ