गंगा और यमुना से शुद्ध है बेतवा नदी का जल
झांसी। महानगरवासी खुशकिस्मत हैं कि उन्हें बेतवा नदी का शुद्ध जल पीने के लिए मिल रहा है। यह पानी गंगा और यमुना नदी से भी बेहतर है। माताटीला बांध से आने वाले पानी की बबीना जल शोधन प्लांट पर प्रतिदिन जांच की जा रही है। जांच के लिए पानी के सैंपल लेने के बाद उसमें से कुछ सैंपल लखनऊ भी भेजे जाते हैं। जांच के बाद पानी में सभी पोषक तत्व पाए गए हैं। बेतवा नदी का अधिकांश रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता है और नदी के किनारे बड़े महानगर नहीं हैं। इस कारण नदी में प्रदूषित पानी नहीं जाता है।
मध्य प्रदेश के भोपाल से बेतवा नदी का उद्गम होने के बाद विदिशा, ललितपुर, झांसी, ओरछा, चिकासी होकर हमीरपुर में यमुना नदी में विलीन हो जाती है। बेतवा नदी के किनारे कोई बड़ा महानगर नहीं होने के कारण नदी प्रदूषित नहीं है। बेतवा का अधिकांश रास्ता घने जंगलों से होकर गुजरता है, इसलिए भी प्रदूषण बहुत कम है। यही कारण है कि बेतवा नदी के पानी का रंग और स्वाद अच्छा है। ज्यादा कैल्शियम या मैग्नीशियम नहीं पाया जाता है। पानी में आर्सेनिक, लेड, सैलेनियम, पारा, फ्लोराइड, नाइट्रेट जैसे हानिकारक तत्व भी नहीं पाए जाते हैं।
यदि बेतवा नदी के पानी की तुलना गंगा अथवा यमुना नदी के पानी के पीएच मान (हाइड्रोजन की क्षमता) से की जाए तो बेतवा का पानी बेहतर है। नदी का पीएच मान 7.4 होना चाहिए। इस हिसाब से बेतवा नदी का पीएच मान 6.4 से 7.8, गंगा का पीएच मान 7.1 से 9.6 और यमुना का पीएच मान 7.5 से 11.8 के बीच है। इसीलिए बेतवा नदी का पानी अन्य नदियों की तुलना में बेहतर है। महानगर की आधी से अधिक आबादी को माताटीला बांध से आने वाले पानी की आपूर्ति की जाती है। महानगर में प्रतिदिन 1100 करोड़ लीटर पानी आ रहा है।
भोपाल से आने वाली बेतवा नदी का पानी सबसे पहले ललितपुर स्थित राजघाट बांध में रोका जाता है। बांध के पानी से माताटीला बांध को भरा जाता है। माताटीला बांध से सुकुवां - ढुकुवां व पारीछा बांध में पानी पहुंचता है। इसके बाद जालौन व हमीरपुर में नहरों के माध्यम से सिंचाई के लिए पहुंचाया जाता है।
बालू का बहुत बड़ा स्र्रोत
बेतवा नदी को बालू का बहुत बड़ा स्रोत माना जाता है। नदी की बालू कानपुर और लखनऊ तक पहुंचती है। बेतवा नदी पर झांसी में एरच घाट, हमीरपुर में चिकासी घाट और हमीरपुर बालू के बड़े उत्पादक क्षेत्र हैं।
पहूंज बांध के पानी की प्रतिदिन नहीं होती जांच
महानगर में माताटीला बांध के अलावा पहूज बांध से पानी आता है। यह पानी दतिया गेट फिल्टर पर आता है। जल शोधन के बाद दतिया गेट, नई बस्ती, उनाव गेट, मुकरयाना समेत शहर क्षेत्र की लगभग 50 हजार आबादी को पानी उपलब्ध कराया जाता है। पानी की जांच महीने में एक बार होती है। हालांकि, अधिकारियों का दावा है कि यहां के पानी में भी सभी पोषक तत्व मौजूद हैं।
यह होता है पीएच मान
पोटेंशियल ऑफ हाईड्रोजन (पीएच) का अर्थ हाईड्रोजन की क्षमता से होता है। पीएच का पैमाना 0 से 14 तक होता है। इसका अर्थ यह है कि यदि पीएच मान सात या उससे कम है तो पानी अम्लीय (मीठा) और पीएच मान सात से अधिक है तो पानी क्षारीय (खारा) होता है। 25 डिग्री सेल्सियस तापमान पर 7.0 का पीएच स्तर आदर्श माना जाता है। शुद्ध पानी में हाईड्रोनियम आयन (एच3ओ) और हाईड्राक्साइड (ओएच) बराबर होते हैं।
शुद्ध पानी के मानक
पीएच 6.5 से 8.5 तक
हार्डनेस 200
फ्लोराइड 200
क्लोराइड 1 से 1.5
नाइट्रेट 45
क्षारकता 200
(सभी मिलीग्राम/ लीटर)
वर्जन
माताटीला बांध से आने वाले पानी की जांच बबीना जल शोधन केंद्र पर प्रतिदिन होती है। पानी में सभी पोषक तत्व मौजूद हैं। पानी के सैंपल लेने के बाद उसमें से दो प्रतिशत सैंपल लखनऊ जांच को भेजे जाते हैं। सभी सैंपल ठीक आ रहे है। - एके गुप्ता, अधिशासी अभियंता, उप्र जल निगम
महानगर को पहूंज बांध से मिलने वाले पानी की जांच प्रयोगशाला में कराई जाती है। पानी शुद्ध आता है। - कुलदीप सिंह, अधिशासी अभियंता जलसंस्थान