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मौत के बाद भी रहम नहीं

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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमित जीते जी तमाम लोगों के लिए पैसा कमाने का जरिया बने हुए हैं। लेकिन, मौत के बाद भी उन पर रहम नहीं किया जा रहा है। कोरोना संक्रमितों के शवों के पास पाया जाने वाला कीमती सामान भी उड़ा दिया जा रहा है। सोमवार को पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पकड़े गए तीन लोगों के पास से पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। ये फोन उन्होंने संक्रमितों की मौत के बाद चोरी कर लिए थे। पुलिस के हत्थे चढ़े तीनों लोग मेडिकल कॉलेज में ही कार्यरत हैं।
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कोरोना वायरस के संक्रमितों को निजी अस्पतालों में इलाज पर लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। महंगी दवाइयां और इंजेक्शन उन्हें लिखे जा रहे हैं। हाल ही में हालात ये रहे कि मरीजों के परिजनों को एक-एक लाख रुपये तक में रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने पड़ गए। मुनाफाखोरों ने महामारी की चपेट में आए लोगों को पैसा कमाने का जरिया बना रखा है। लेकिन, मौत के बाद भी उन पर रहम नहीं किया जा रहा है। कोरोना संक्रमित की मौत के बाद परिजनों को केवल शव थमा दिया जाता है। जबकि, मरीज के साथ का सामान्य गायब मिलता है। इसी तरह के एक मामले में अंकित यादव नाम के युवक ने नवाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराइ, जिसमें उसने बताया था कि उसकी मां तुलसा यादव का इलाज मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में चल रहा था। इलाज के दौरान मां की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद मां के पास मौजूद मोबाइल फोन अस्पताल से चोरी कर लिया गया। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दी।
पुलिस अधीक्षक (नगर) विवेक त्रिपाठी ने सीओ सिटी राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम गठित कर दी। जांच में पता चला कि मेडिकल कॉलेज के सफाई कर्मचारी ही मृतकों के मोबाइल फोन व अन्य सामान चोरी कर रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने बड़ागांव के दोन निवासी अंकित अहिरवार को गिरफ्तार किया। उसके पास से चोरी का एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर अंकित ने पुलिस को बताया कि इस काम में उसके साथी बड़ागांव के दोन निवासी प्रभात अहिरवार व विष्णु अहिरवार भी शामिल हैं। उन दोनों के पास से भी चोरी के चार स्मार्ट फोन बरामद किए गए। पकड़े गए बदमाशों ने बताया कि वे कोरोना संक्रमितों के शव को पैक करते समय उनके फोन चोरी कर लेते थे।
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