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बीएएमएस छात्रा को बना दिया डॉक्टर, लेटरपैड पर लिखीं सुविधाएं भी नहीं

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झांसी। नर्सिंगहोमों में जब बीएएमएस छात्रा डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करेगी तो सोचिए क्या होगा? लेटरपैड पर लिखीं सुविधाएं भी नहीं होंगी तो कैसे गंभीर मरीजों के रोगों की जांच और इलाज हो सकेगा? ये हाल है झांसी के नर्सिंगहोमों का। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि झांसी के मरीज इलाज के लिए क्यों ग्वालियर, कानपुर, दिल्ली और अन्य महानगरों की तरफ भागते हैं। मानकों की धज्जियां उड़ाकर खुले गए नर्सिंगहोमों ने झांसी को बदनाम कर दिया है।
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शासन की सख्ती का असर अब दिखने लगा है। मानक के विपरीत चल रहे नर्सिंगहोमों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मार्च को दोपहर पौने एक बजे निरीक्षण किया। वांछित अभिलेखों का मिलान के लिए मूल अभिलेखों को दिखाने के लिए कहा गया लेकिन कोई भी अभिलेख नहीं दिखाया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में सिर्फ बीएएमएस डॉक्टर उपस्थित मिले। उक्त हॉस्पिटल में अन्य कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं मिले और सभी डॉक्टर कक्ष बंद थे। बाद में उक्त हॉस्पिटल के संचालक आए मगर इनके द्वारा भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं किए गए। मरीजों की केस हिस्ट्री अपूर्ण मिली। 25 दिसंबर 2020 को अंजू दुबे पत्नी संतोष दीक्षित निवासी दतिया की मौत डीएनसी के दौरान हो गई थी। इन आरोपों की जांच के संबंध में हॉस्पिटल रिकॉर्ड मांगने पर उपलब्ध नहीं कराए गए। शिकायतकर्ता द्वारा हॉस्पिटल के निदेशक को बुलाने पर दूसरे डायरेक्टर द्वारा लिखकर दिया गया है कि उक्त नाम का कोई व्यक्ति इनके प्रतिष्ठान में नहीं है। जबकि, लेटर पेड पर लिखे मोबाइल नंबर पर फोन किया गया तो उस पर शिकायतकर्ता द्वारा लिखे गए निदेशक का नाम आया।
वहीं, गीता मेमोरियल अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि डॉक्टर द्वारा भर्ती मरीजों को चिकित्सीय सुविधाएं अनाधिकृत रूप से दी जा रही थी, जो प्रयागराज से बीएएमएस कर रही है। इनकी डिग्री अभी भी पूर्ण नहीं हुई है। भौतिक निरीक्षण में यह भी पाया गया कि हॉस्पिटल में लेटर पैड पर सुविधाओं का उल्लेख किया गया था, वो वास्तविकता में उपलब्ध नहीं थी। एक्सरे मशीन लगी हुई थी मगर उसका पूर्व में लगाने की अनुमति नहीं दिखाई गई। बोर्ड पर डिस्प्ले में मृत डॉक्टर व अन्य डॉक्टरों के नाम लिखे हुए थे मगर मांगने पर भी उपरोक्त डॉक्टरों का कोई भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसी आधार पर दोनों अस्पतालों का लाइसेंस निरस्त किया गया है।
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लगातार जारी रहेगा निरीक्षण
झांसी में स्वास्थ्य विभाग से लगभग सवा सौ नर्सिंगहोम पंजीकृत हैं। शासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार निरीक्षण कर नर्सिंगहोमों में मानकों की जांच कर रही है। बताया गया कि अभी कुछ ही नर्सिंगहोमों का निरीक्षण हो सका है। ये लगातार जारी रहेगा। ऐसे में कई और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई तय है।
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