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तपोस्थली है बलखंडेश्वर महादेव मंदिर, अगस्त्य ऋषि से जुड़ाव की है मान्यता

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ग्राम सैंयर की पहाड़ी पर स्थापित प्राचीन बलखंडेश्वर महादेव मंदिर।
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तपोस्थली है बलखंडेश्वर महादेव मंदिर, अगस्त्य ऋषि से जुड़ाव की है मान्यता
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झांसी। श्रावण मास में लोग शिव भक्ति में डूबे हैं। शिवालयों में भक्तों की खूब भीड़ उमड़ रही है। बिजौली के सैंयर गांव स्थित प्राचीन बलखंडेश्वर महादेव मंदिर में भारी तादाद में श्रद्धालु भगवान के दर्शनों के लिए उमड़ रहे हैं। मंदिर के संपूर्ण क्षेत्र को संन्यासियों की तपो स्थली कहा जाता है। मान्यता है कि यहां अगस्त्य ऋषि का आगमन हुआ था।
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झांसी और आसपास का इलाका भगवान शिव की भक्ति में हमेशा अग्रणी रहा है। कई एतिहासिक एवं प्राचीन शिवालय जगह-जगह बने हैं। इन्हीं में एक है बिजौली के वन्य क्षेत्र की पहाड़ी पर मौजूद बलखंडेश्वर महादेव मंदिर। गर्भगृह में भगवान शिव के समीप ब्रह्मा और अन्य देवता विराजमान हैं। मंदिर परिसर में मां सिहंवाहिनी, हनुमान जी और गुरु जी की प्रतिमा प्रतिष्ठापित है। पुजारी अंजनी गिरी संपूर्ण मंदिर क्षेत्र सन्यासियों की तपो स्थली है। यहां जूनागढ़ सन्यासी आश्रम के नागा साधू रहते हैं। वन्य क्षेत्र होने के कारण भारी संख्या में मोर, लंगूर, बंदर, सियार आदि जानवर सरलता से दिख जाएंगे। इनके भोजन की व्यवस्था भी मंदिर परिसर में प्रतिदिन की जाती है। आसपास पानी का स्त्रोत न होने पर मंदिर के समीप बने तालाब में यह पानी पीने आते हैं। दो पुराने कुंड हैं, जिनमें हमेशा पानी रहता है। वहीं, मंदिर क्षेत्र से चंद दूरी पर ही सिद्ध बाबा का स्थान है। मान्यता है कि यहां अगस्त्य ऋषि का आगमन हुआ था और उनका आश्रम था। इसके अलावा पुरानी बस्ती एवं बाबड़ी होने के अवशेष भी बिखरे हैं। इधर, पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि इस क्षेत्र का जल्द ही सर्वे किया जाएगा।
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