झांसी। पिछड़ा बुंदेलखंड होम्योपैथी में भी काफी पीछे हैं। यहां पर कई जिलों में आबादी की तुलना में अस्पतालों की संख्या काफी कम है। बुंदेलखंड का केंद्र माने जाने वाले झांसी में तो सातों जिलों की तुलना में सबसे कम होम्योपैथी चिकित्सालय हैं। कई अस्पतालों के पास खुद के भवन नहीं हैं। डॉक्टर, फार्मासिस्ट से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का काफी टोटा है। इससे मरीजों का इलाज प्रभावित होता है।
झांसी में मौजूदा समय में जिला अस्पताल, सीपरी बाजार, आवास विकास, कोछाभावर, बड़ागांव, चिरगांव, बबीना, मऊरानीपुर और कटेरा में राजकीय होम्योपैथी चिकित्सालय खुले हुए हैं। इसमें ने जिला अस्पताल, आवास को छोड़ दें तो ज्यादातर चिकित्सालय स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्य केंद्रों या किराए के भवन में चल रहे हैं। जबकि, जिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 250 से 300, सीपरी बाजार की 150 से 180 और अन्य में 50 से 80 तक मरीज दिखाने के लिए आते हैं। इनमें सिर्फ कटेरा में होम्योपैथी का कोई डॉक्टर नहीं है। मऊरानीपुर के चिकित्सक की सप्ताह में एक दिन यहां पर ड्यूटी लगाई जाती है। पांच दिन तक लोगों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। वहीं, 20 लाख की आबादी वाले झांसी में कई तहसीलों तक में होम्योपैथी अस्पताल नहीं खुल पाए हैं। ऐसे में बड़ी आबादी को इसका कोई फायदा नहीं हो पा रहा है। वह ज्यादातर प्राइवेट क्लीनिक पर निर्भर हैं। दवाएं भी काफी महंगी आने की वजह से हर कोई इसका इलाज नहीं करा पाता। जबकि, सरकारी अस्पताल में दवाएं नि:शुल्क मिलती है। इसी तरह, ललितपुर, जालौन समेत बुंदेलखंड के अन्य जिलों में भी डॉक्टर समेत कर्मचारियों के पद रिक्त पड़े हैं।
नौ में से छह फार्मासिस्ट, तीन चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं
जिला अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप राजन ने बताया कि होम्योपैथी अस्पतालों के संचालन में सबसे बड़ी दिक्कत स्टाफ की कमी की वजह से आ रही है। नौ अस्पतालों में में से छह जगहों पर फार्मासिस्ट का पद रिक्त है। डॉक्टरों को ही दवाओं के स्टॉक की की लिखा पढ़ी, मरीज का पर्चा बनाना और दवाओं देने का काम कर पड़ता है। तीन अस्पतालों में तो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक नहीं हैं।
जिला होम्योपैथी अधिकारी तक में कोई कर्मचारी नहीं
जिला होम्योपैथी अधिकारी के कार्यालय तक में एक भी कर्मचारी का पद सृजित नहीं हैं। जबकि, यहां पर कम से कम एक-एक बाबू और चतुर्थ कर्मचारी की जरूरत है। अब तो शासन ने मंडल स्तर पर सीएमएस की तैनाती के निर्देश दे दिए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये उठा रहा है कि उन्हें स्टाफ मिलेगा या नहीं?
14 साल से नहीं खुला अस्पताल, 11 का भेजा प्रस्ताव
झांसी में मोंठ, गरौठा, गुरसराय, खैलार, रक्सा, टोड़ीफतेहपुर, राजगढ़, भट्टागांव समेत 11 होम्योपैथी अस्पताल खोलने का प्रस्ताव कई बार जिला स्तर से शासन को भेजा जा चुका है। जबकि, पिछले 14 साल से यहां पर कोई नया होम्योपैथी अस्पताल नहीं खोला गया है। अंतिम बाद 2008 में बड़ागांव, कोछाभावर में अस्पताल खोला गया था।
जनपद आबादी होम्योपैथी अस्पताल
महोबा 8,75,055 11
चित्रकूट 9,90,626 14
हमीरपुर 11,04,021 21
ललितपुर 12,18,002 25
जालौन 16,70,718 13
बांदा 17,99,541 27
झांसी 20,00,755 9
होम्योपैथी अस्पतालों में दवाओं की कमी नहीं रहती है। कई जगहों पर ओपीडी भी अच्छी होती है। जिले में अस्पताल बढ़ाने और रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया है। - डॉ. पूनम बुधरानी, प्रभारी जिला होम्यापैथी अधिकारी।