baccho ko khoob chapet me le raha corona ka naya mutent
झांसी। कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन इस बार बच्चों को भी खूब अपनी चपेट में ले रहा है। हाल ये है कि कोरोना संक्रमित बच्चों में सिरदर्द तक के सामान्य लक्षण तक सामने आ रहे हैं। कई बच्चों में बुखार, जुकाम, खांसी के अलावा लूज मोशन के लक्षण भी मिल रहे हैं। पिछले 15 दिनों में संक्रमण की चपेट में आने वाले 15 बच्चों को भर्ती तक करना पड़ा है।
कोरोना की दूसरी लहर ने हालातों को काफी बिगाड़ दिया है। हाल ये है कि पूरे-पूरे परिवार के सदस्य तक कोरोना संक्रमित हो रहे हैं। खास बात ये है कि इस बार कोरोना संक्रमण बच्चों को भी खूब अपनी चपेट में ले रहा है। रोजाना कई-कई बच्चे पॉजिटिव हो जा रहे हैं। कुछ की हालत ज्यादा बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज या अन्य अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है। पिछले 15 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो लगभग 80 बच्चे वायरस का शिकार हो चुके हैं। इनमें से लगभग 15 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए हैं। वहीं, इस मामले में मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि कोरोना का नया स्ट्रेन इस बार बच्चों को भी खूब चपेट में ले रहा है। लगातार बच्चों के संक्रमित होने के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि राहत की बात ये है कि अब तक किसी भी बच्चे के बहुत अधिक गंभीर होने का मामला सामने नहीं आया है।
मां से एक दिन का नवजात भी हुआ संक्रमित
रविवार को मेडिकल कॉलेज में एक दिन का नवजात बच्चा कोरोना की चपेट में आने के कारण भर्ती किया गया। बताया गया कि बच्चे की मां भी कोरोना संक्रमित थी। उसकी मेडिकल कॉलेज में डिलीवरी की गई। इससे बच्चा भी संक्रमित हो गया।
ये हैं मामले
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केस-1
सिविल लाइन निवासी पांच साल के बच्चे को सिरदर्द की शिकायत थी। अस्पताल में दिखाने आया तो कोरोना की जांच हुई है। इसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। इसके बाद बच्चे को होम आइसोलेशन में रखा गया। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं खाकर बच्चा ठीक हो गया।
केस-2
मऊरानीपुर का सात वर्षीय बच्चा गले में सिक्का फंस जाने के कारण मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आया। ओपीडी पर्चा बनाने से पहले उसकी कोरोना की जांच हुई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। हालांकि, इमरजेंसी को देखते हुए डॉक्टर ने कोविड आईसीयू में उसका ऑपरेशन किया।
केस-3
सीपरी बाजार निवासी 10 साल के बच्चे को बुखार आया और गले में खराश शुरू हो गई। परिजन कोरोना की जांच कराने पहुंचे तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। हालांकि, चार दिन बाद बच्चे की रिपोर्ट निगेटिव आ गई। मगर उसको काफी कमजोरी और भूख कम लगने की समस्या हो गई।