बेहतर सेहत के लिए बच्चे को स्तनपान कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अब इसकी निगरानी के लिए प्रदेश सरकार ने ‘बेबी फ्रेंडली’ मोबाइल एप लांच किया है। क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर (क्यूएएम)/नर्स मेंटर प्रसव केंद्र में जाकर रोजाना स्तनपान का डाटा फीड करेंगी। यह डाटा प्रसव केंद्र प्रभारी की तरफ से भेजी गई रिपोर्ट से न मिलने पर शासन स्तर से कार्रवाई होगी।
विश्व स्तनपान सप्ताह एक से सात अगस्त तक चलेगा। सभी जनपदों में प्रसूता व उनके परिजनों को बच्चे की बेहतर सेहत के लिए जन्म से एक घंटे के अंदर से ही स्तनपान कराने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। मां के दूध से बच्चों को मिलने वाले फायदे बताने के लिए गोष्ठी, प्रतियोगिता आदि कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। हाल में प्रदेश सरकार ने निगरानी के लिए मोबाइल एप शुरू किया है।
जिला महिला अस्पताल के क्वालिटी मैनेजर गौरव सक्सेना बताते हैं कि स्तनपान व्यवहार को बढ़ावा देने और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक नया पोर्टल बनाया है, जिसका नाम ‘बेबी फ्रेंडली’ एप रखा गया है। इसके माध्यम से जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान को बढ़ावा देना है। मॉनीटरिंग की वजह से इससे लोगों और स्टॉफ में भी जागरूकता आएगी। इसमें नर्स मेंटर डिलेवरी सेंटर से रोजाना किसी भी एक बच्चे के स्तनपान का डाटा एप में फीड करेंगे। इससे यह पता चल पाएगा कि कितने बच्चों को पहले घंटे में स्तनपान कराया जा रहा है। यह डाटा शासन को भेजी गई मासिक रिपोर्ट से मिलान किया जाएगा। एप का डेटा मासिक रिपोर्ट से न मिलने पर शासन स्तर से कार्रवाई की जाएगी।
मोबाइल एप में यह डेटा होगा फीड
एप में मंडल, जिला व क्वालिटी एश्योरेंस मैनेजर/ नर्स मेंटर का नाम, मिलने की तारीख व समय, प्रसव का समय, प्रसव का प्रकार, बच्चे का वजन (ग्राम), केएमसी (कंगारू मदर केयर), विटामिन के वन, म्युकस, नाल काटने का समय, बर्थ कंपैनियन (प्रसूता के साथ कोई है या नहीं), मां की तरफ से स्तनपान की शुरुआत हुई या नहीं, बच्चे ने स्तनपान कब शुरू किया, कहां शुरुआत हुई (लेबर रूम पीएमसी या केएमसी), स्टाफ नर्स और आशा द्वारा इसकी शुरुआत में सहायता प्रदान की गई या नहीं समेत 18 बिंदुओं की जानकारी फीड होगी।
क्या कहते हैं आंकड़े?
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के अनुसार जनपद में एक घंटे के अंदर स्तनपान की दर 35.1 प्रतिशत ही है और छह माह तक स्तनपान की दर 52.2 प्रतिशत है। वहीं, सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) 2016 के अनुसार शिशु मृत्यु दर प्रति 1000 पर 41 है।