झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के बाबुओं के गबन के आरोपों की जांच शुरू हो गई है। सदर विधायक रवि शर्मा के शिकायती पत्र पर डीजी ने प्राचार्य से जवाब मांग लिया है। जांच के लिए गठित समिति तीन दिन में बिंदुवार रिपोर्ट सौंपेगी।
मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2016 से 2018 बैच के जूनियर डॉक्टरों को पासआउट होने के बाद भी कई महीने तक भुगतान किया गया। इससे लगभग एक करोड़ से अधिक की वित्तीय अनियमितता सामने आई। इस मामले को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। कॉलेज प्रशासन ने जांच के लिए कमेटी गठित तो की मगर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले समेत कई आरोप लगाते हुए टकसाल निवासी एक व्यक्ति ने शिकायत की थी। सदर विधायक रवि शर्मा ने 30 जून को डीजी को लिखे पत्र में उस व्यक्ति का प्रार्थनापत्र संलग्न करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में दो बाबू दस सालों से भ्रष्टाचार कर वित्तीय गबन कर रहे हैं। इनके पद पर रहने से वर्तमान सरकार की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इन कर्मचारियों को अन्य मेडिकल कॉलेज स्थानांतरित करते हुए जांच कराई जाए। डीजी ने 13 जुलाई को प्राचार्य को पत्र लिखकर जांच कर आख्या मांग ली। प्राचार्य ने भी जांच के लिए कमेटी गठित कर दी। 20 जुलाई को डीजी ऑफिस से दोबारा पत्र भेजा गया कि एक सप्ताह बाद भी जांच आख्या नहीं मिली है। अब कमेटी ने जांच तेज कर दी है।
जांच चलती रही, और बड़ी जिम्मेदारी दे दी
इस प्रकरण में शिकायतकर्ता व्यक्ति ने मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठा दिए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि ज्यादा एरियर भुगतान मामले में जिस कर्मचारी की जांच चल रही थी, उस पर कार्रवाई करना तो दूर मेडिकल कॉलेज अधिकारियों ने और बड़ी जिम्मेदारी दे दी।
शिकायतकर्ता समेत कुछ लोगों के बयान दर्ज हो गए हैं। इस मामले में कुछ और लोगों के बयान दर्ज किए जाने हैं। तीन दिन में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दूंगा। - डॉ. सुधीर कुमार, जांच अधिकारी।