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नर्सिंगहोम में इलाज करना तो फीस दो, दवाएं खरीदो

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नर्सिंगहोम में इलाज करना तो फीस दो, दवाएं खरीदो
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झांसी। आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेना है तो सरकारी अस्पताल जाओ। नर्सिंगहोम में इलाज कराना है तो डॉक्टर की फीस देनी पड़ेगी और दवाएं भी खरीदनी पड़ेंगी। ये दुखड़ा आयुष्मान योजना के मरीजों ने अमर उजाला के मोबाइल नंबर पर फोन करके सुनाया। उन्होंने इलाज न करने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना का कई निजी नर्सिंग होम पलीता लगा रहे हैं। आयुष्मान योजना का पात्र बताते ही नर्सिंग होम तुरंत मरीज को सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दे देते हैं। नर्सिंगहोम में इलाज कराने पर उनके सामने पैसे देने की शर्त रखी जाती है। रविवार को अमर उजाला के मोबाइल नंबर पर फोन करके आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों ने अपना दुखड़ा सुनाया। मोंठ निवासी मनोज बादल (35) ने बताया कि उनका आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड बना हुआ है। दांत में कुछ समस्या होने पर वह मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक नर्सिंगहोम में दिखाने गए। तो उनसे कहा गया कि यहां इलाज नहीं होगा। मेडिकल कॉलेज चले जाओ। जबकि, नर्सिंगहोम में आयुष्मान योजना के मरीजों का इलाज करने संबंधी बोर्ड भी लगा था। जब मनोज ने योजना में पंजीकृत होने के बावजूद इलाज न करने पर सवाल किया तो नर्सिंग होम की तरफ से डॉक्टर की फीस देने और दवाएं खरीदकर लाने की शर्त रखी गई। नर्सिंग होम की तरफ से कहा गया कि शासन से पैसा देर में मिलता है, इसलिए आयुष्मान रोगियों का इलाज नहीं करते हैं। मनोज के अनुसार उन्होंने मामले की शिकायत सीएमओ से भी शिकायत की है।
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वहीं, सीपरी बाजार निवासी महक (12) मधुमेह रोगी हैं। शुगर बढ़ने के कारण महक को परिजन आयुष्मान योजना के अंतर्गत पंजीकृत एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। महक की बहन रितु ने बताया कि अस्पताल ने उनसे पहले पैसे ले लिए, कहा कि बाद में वापस कर देंगे। इसके बाद भी लगातार फीस लेते रहे और बाहर से दवाएं मंगवाते रहे। इलाज में उनके लगभग 50 हजार रुपये खर्च हो गए। जब उनके पास इलाज कराने के पैसे नहीं बचे तो मजबूरी में महक को घर ले आना पड़ा। अस्पताल की तरफ से उन्हें पैसा भी वापस नहीं किया गया। उन्होंने नर्सिंग होम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इसी तरह, मऊरानीपुर के रहने वाले राघवेंद्र भी आयुष्मान योजना के पात्र हैं। उन्होंने बताया कि पेट में पथरी का ऑपरेशन कराने के लिए उन्होंने आयुष्मान योजना के अंतर्गत पंजीकृत निजी अस्पतालों की सूची देखी। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित एक निजी नर्सिंग होम में फोन मिलाया। फोन पर उन्होंने कहा कि उनके पास गोल्डन कार्ड है। क्या उनका ऑपरेशन हो जाएगा। इस पर फोन उठाने वाले व्यक्ति ने सीधे मना कर दिया। वह कुछ आगे बोल पाते इससे पहले ही फोन काट दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना के हेल्पलाइन नंबर पर फोन लगाते हैं तो वह लगता नहीं है। सरकार ने योजना तो लागू कर दी है लेकिन सिस्टम की अव्यवस्था के कारण मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
आयुष्मान योजना के मरीजों की बीमारी जानने के लिए अस्पताल पहले जांच कराता है। यदि निजी अस्पताल है तो वह जांच की फीस लेते हैं। इसके बाद इलाज की पूरी फाइल और पैकेज तैयार कर योजना के पोर्टल पर अपलोड की जाती है। जैसे ही यह अपलोड हो जाती है, तो तुरंत नर्सिंग होमों को फीस के पैसे वापस करने का प्रावधान है। यदि कोई भी नर्सिंगहोम मरीज का पैसा वापस नहीं कर रहा, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी हाल में योजना के पात्रों को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। - डॉ. सुशील प्रकाश, सीएमओ।
अमर उजाला का अभियान
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को एक साल पूरे होने वाले हैं। इतना लंबा समय गुजरने के बाद भी सरकार की नि:शुल्क इलाज देने की मंशा अब तक अधूरी है। इस योजना के अंतर्गत जनपद की स्थिति और लाभार्थियों की समस्याओं को लेकर अमर उजाला अभियान चला रहा है। अभियान के तहत लगातार सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर योजना की हकीकत बयां की जा रही है।
आप भी दे सकते सुझाव
योजना के संबंध में कोई भी सुझाव या जानकारी देने के लिए आप हमारे मोबाइल नंबर 7617566165 पर व्हाट्सएप कर सकते हैं। इसके अलावा jhs-cityreporter@jhs.amarujala.com पर ई-मेल भी कर सकते हैं।
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योजना के बारे में जानें
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को की गई थी। इसके तहत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों को लाभार्थी बनाया गया। योजना के पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में लाभार्थी इलाज करा सकते हैं। योजना के तहत लाभार्थी को प्रति वर्ष पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
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