भोजन का अनुपात बदल उम्र बढ़ाने पर शोध शुरू
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के शिक्षक ने भोजन का अनुपात बदलकर उम्र बढ़ाने पर शोध शुरू कर दिया है। फल मक्खी पर किए जा रहे शोध के लिए उन्होंने भोजन (प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट) का अलग-अलग अनुपात तय किया है। फल मक्खियों को किस भोजन अनुपात से क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका अध्ययन किया जाएगा। इसके साथ नियत ऑक्सीजन भी उम्र बढ़ाने में कितनी कारगर है, इस पर भी शोध होगा। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने उन्हें नए प्रोजेक्ट पर शोध करने के लिए अनुदान दे दिया है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के जंतु विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. जेपी यादव ने बताया कि उनके प्रोजेक्ट का नाम ‘न्यूट्रीशनल जियोमेट्री एंड माइट्रोकॉन्ड्रियल असिस्मेंट फॉर लॉन्जीविटी एंड फिटनेस रिलेटेड स्टडीज इन ड्रोसोफिला एनानेसी’ है। इस प्रोजेक्ट पर शोध करने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) का प्रस्ताव भेजा था। डीएसटी ने स्वीकृति देते हुए तीन सालों के लिए 41 लाख रुपये अनुदान भी दिया है। डॉ. जेपी यादव ने बताया कि गुणसूत्र के स्तर पर फल मक्खी और इंसान लगभग 80 प्रतिशत तक समान हैं। इस वजह से फल मक्खी पर किए गए अध्ययन इंसानों पर भी लागू होंगे। वर्तमान प्रोजेक्ट में माइट्रोकॉर्न्डिया (ऊर्जा घर) का अध्ययन पोषक तत्व ज्यामिति और ऑक्सीजन स्तर को नियंत्रित करके किया जाएगा। ऊर्जा घर में सबसे ज्यादा फ्री रेडिकल्स (मुक्त कण) होते हैं, जो शरीर में प्रोटीन या जीन को नुकसान पहुंचाते हैं। इन्हीं से विभिन्न बीमारियां और तेजी से उम्र परिवर्तन होता है। वर्तमान प्रोजेक्ट में इसे ही नियंत्रित कर उम्र बढ़ाने में ऊर्जा घर के योगदान का अध्ययन किया जाएगा।
क्या है फल मक्खी
यह मक्खी पके हुए फलों, सब्जियों पर अंडे देती हैं। इन अंडों से लार्वा बनता है। वही लार्वा भोजन एकत्रित कर प्यूपा बन जाता है। प्यूपा में ही फल मक्खी बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। कुछ दिन बाद फल मक्खी प्रौढ़ होकर बाहर आ जाती है।
36 डाइट का अनुपात बनाया
फल मक्खियों के लिए भोजन (प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट) का अलग-अलग अनुपात तय किया गया है। शोध के दौरान किसी को 25 फीसदी प्रोटीन तो किसी को 150 फीसदी कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन दिया जाएगा। वहीं, किसी को 25 फीसदी कार्बोहाइड्रेट तो किसी को 150 प्रतिशत प्रोटीन युक्त भोजन दिया जाएगा। इनके बीच में भी अन्य 34 डाइट का अनुपात बनाया गया है। इसके अलावा फल मक्खियों को एक नियत ऑक्सीजन कंट्रोल चेंबर में रखा जाएगा। अलग-अलग भोजन की मात्रा और नियत ऑक्सीजन से क्या-क्या प्रभाव पड़ रहा है, इसका अध्ययन होगा।
फल मक्खी की औसत उम्र दोगुनी कर चुके
डॉ. जेपी यादव ने पिछले वर्ष ‘स्टडी ऑन लॉन्जीविटी एंड इट्स इंपैक्ट ऑन एसोसिएटेड ट्रेट्स इन ड्रोसोफिला एनानेसी’ विषय पर शोध किया था। शोध में उन्होंने फल मक्खी की औसत उम्र 80 दिनों से बढ़ाकर 169 दिन कर दी थी।