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जूनियर्स के बन गए मित्र, लोगों को कर रहे कोरोना के प्रति जागरूक

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डॉ. अमित मोहन वार्ष्णेय। - फोटो : REPORTERS
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झांसी। कोरोना के इस युद्ध में डॉक्टर ‘सैनिक’ बनकर उभर रहे हैं। खुद की जान जोखिम में डालकर वो कोरोना से जंग लड़ रहे हैं। ऐसे ही एक कोरोना से लड़ाके हैं महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग में तैनात महामारी विशेषज्ञ डॉ. अमित मोहन वार्ष्णेय। इन दिनों वह अपने विभाग के जूनियर डॉक्टरों के मित्र बन गए हैं। साथ ही लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर में जारी किया हुआ है। कोई भी फोन आने पर वह कोरोना संदिग्ध व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाते हैं।
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मेडिकल कॉलेज में कोई भी कोरोना का संदिग्ध मरीज भर्ती होता है तो पिछले 20 दिनों का ब्योरा डॉ. अमित ही तैयार करते हैं। संदिग्ध कब से बीमार है, उसे क्या तकलीफ है। पिछले 20 दिन में वह कहां-कहां गया, किससे-किससे मिला। फिर उनके फोन नंबर लेकर वह संदिग्ध के संपर्क में आने वालों से बात करते हैं। इनमें से कोई बीमार तो नहीं है, यह जानकारी जुटाते हैं। यह काम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक भी व्यक्ति छूट गया और वह कोरोना का संक्रमित हुआ तो कइयों में वायरस फैला सकता है। इसके अलावा वह लगातार अपने मिलने वालों को फोन करके कोरोना की बीमारी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उन्होंने कोरोना संदिग्ध की सूचना देने के लिए फोन नंबर भी जारी किया है। जैसे ही किसी व्यक्ति की सूचना मिलती है, वो तुरंत उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाते हैं। इसके अलावा अपने विभाग के पीजी छात्रों के साथ इस समय सीनियर नहीं बल्कि मित्र बनकर काम कर रहे हैं, ताकि जूनियर डॉक्टरों का भी मनोबल व उत्साह बना रहे। डॉ. अमित का कहना है कि वह इस बीमारी से बिल्कुल भयभीत नहीं हैं। उनका काम लोगों की सेवा करना है। बतौर चिकित्सक इस समय तो जिम्मेदारी और बढ़ गई है। वह पूरी मेहनत और लगन से अपने काम में जुटे हैं।
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