चमगादड़ों के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण की आशंकाओं के बीच पूरा विश्व डरा हुआ है। इस दौरान महानगर की आबादी के इर्दगिर्द चमगादड़ों की संख्या बढ़ने से लोग भयभीत हैं। झांसी के किले व शहर के खंडहर व अन्य सुनसान इलाकों में भी इनकी संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है।
ललितपुर में गोविंद सागर बांध के इर्दगिर्द बड़ी संख्या में चमगादड़ों का बसेरा मिला है। हालांकि, अब तक चमगादड़ों से कोरोना के संक्रमण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन, सोशल मीडिया पर पहले वायरल हो चुकीं अपुष्ट जानकारियों की वजह से लोग चमगादड़ों की संख्या बढ़ने से सहमे हुए हैं।
झांसी के किले में भी इनकी संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। पंच महल व किले की कोठरियों में इनके झुंड के झुंड मौजूद हैं। माना जा रहा है लॉकडाउन में पिछले एक महीने से किले में लोगों का आवागमन बंद है।
आवाजाही न होने की वजह से किले में इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। चमगादड़ों की संख्या में हुई एकाएक बढ़ोत्तरी से लोग सहमे हुए हैं। वे इसे इसे करोना वायरस के संक्रमण से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस के प्रसार में अब तक चमगादड़ों की भूमिका की कोई पुष्टि नहीं हुई है। पूर्व में सोशल मीडिया पर जरूर इस तरह की जानकारियां वायरल हुईं थीं।
वहीं, ललितपुर में शहर की प्यास बुझाने वाले गोविंद सागर बांध के गेट के आसपास बड़ी तादात में चमगादड़ों का बसेरा मिला है। गेट के इर्दगिर्द चमगादड़ें मंडराती नजर आती हैं। रविवार को सेक्टर मजिस्ट्रेट भरत कुमार वर्मा बांध का निरीक्षण करने पहुंचे तो स्थिति देख उन्होंने तुरंत इसके रोकथाम पर जोर दिया है।
सेक्टर मजिस्ट्रेट इसकी पूरी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपेंगे। बताया जा रहा है कि चमगादड़ों का झुंड आबादी से मात्र आधा किलोमीटर ही दूर है। सिंचाई विभाग कॉलोनी के गेट के पास प्रथम साइफन/ छोटी नहर के इर्दगिर्द चमगादड़ व चिड़ियों का बसेरा है। बांध के नीचे इनका बसेरा किसी छत्ते की तरह दिखता है। अक्सर यह झुंड में उड़ते हैं। ऐेसे इनकी गंदगी से पानी व आसपास गंदगी फैलती है, इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।
चमगादड़ों के अनुकूल है मौसम का मिजाज
बिपिन बिहारी महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एमएम पांडेय ने बताया कि मौसम में गर्मी के साथ नमी भी है। मौसम का यह मिजाज चमगादड़ों के एकदम अनुकूल है। उनके प्रजनन के लिए भी ये अच्छा पीरियड है। उन्हें कीड़े - मकोड़े भी भरपूर मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि चमगादड़ों की कोरोना वायरस के संक्रमण में अब तक कोई भूमिका सामने नहीं आई है। हालांकि, ये किसी भी प्रकार के वायरस के कैरियर जरूर होते हैं।
मनुष्य को प्रभावित नहीं कर रहे चमगादड़
फिजिशियन डॉ. राजीव जैन ने बताया कि अभी तक की स्टडी में चमगादड़ों में कोरोना वायरस मिलना सामने आया है। लेकिन, ये मनुष्य को कितना प्रभावित कर सकता है, इसका कोई प्रूफ कोई नहीं आया है। वैसे भी देश में न तो ये खाए जाते हैं और न ही ये मनुष्यों के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में चमगादड़ों की बढ़ती संख्या से घबराने की कोई जरूरत नहीं है। ये चमगादड़ों के प्रजनन का समय चल रहा है, जिसकी वजह से इनकी संख्या बढ़ रही है।
चमगादड़ के साथ-साथ चिड़ियों के घोंसले भी हैं। चमगादड़ मंडराते रहते हैं, इसलिए इनकी संख्या अधिक लगती है। जबकि, ऐसा नहीं है। फिर भी कोरोना का खतरा न बढ़े, इसलिए अधिशासी अभियंता से वार्ता करने के बाद चमगादड़ के घोंसलों को हटवा दिया जाएगा।
- विकासदीप भारती, अवर अभियंता, राजघाट निर्माण खंड
यह सिद्ध हो चुका है कि कोरोना वायरस चमगादड़ों में पाया जाता है, लेकिन अभी तक वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध नहीं किया है कि वायरस सीधे चमगादड़ों से मनुष्य में फैला है। इसलिए चमगादड़ से डरने की आवश्यकता तब तक नहीं है, जब तक वैज्ञानिक इसका पूरी तरह से पता न लगा लें।
- डॉ. प्रबल सक्सेना, सामाजिक कार्यकर्ता