झांसी। विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही कर्जदारों ने बैंकों से लिए गए कर्ज की अदायगी से कदम पीछे खींच लिए हैं। इससे बैंकों की वसूली की रफ्तार मंद पड़ गई है। उनका दो अरब से अधिक का कर्ज अटक कर रह गया है। कर्जदार चुनाव के दौरान कर्जमाफी की घोषणा के इंतजार में लिए गए ऋण की अदायगी में कंजूसी दिखा रहे हैं।
जनपद में बैंकों ने 3,25,075 लोगों को कर्ज दे रखा है। इन पर बैंकों का 36 अरब 12 करोड़ 89 लाख रुपये बकाया है। इनमें से 34,351 कर्जदारों ने बैंकों से लिए गए कर्ज की अदायगी करना बंद कर दी है। इन्हें बैंकों का दो अरब रुपये से अधिक का ऋण चुकता करना है। कर्ज की अदायगी न करने वालों में बड़ी संख्या किसानों की है, जिन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के जरिये ऋण लिया है। साथ ही ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरणों की खरीद के लिए कर्ज निकाला है। बैंकों के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ लोगों में कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इस बारे में जानकारों का कहना है कि अक्सर राजनीतिक दलों द्वारा कर्ज माफी की घोषणा की जाती है। सरकार बनने पर इसे अमल में भी लाया जाता है। पूर्व में कई बार लोगों को कर्जमाफी का लाभ भी मिल चुका है। इससे वित्तीय अनियमितता की स्थिति पैदा हो गई है। कर्ज की अदायगी ने किए जाने पर लोगों पर ब्याज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
केस -1
अन्यथा चुनाव के बाद चुकाएंगे रकम
झांसी। मऊरानीपुर के किसान शिवनारायण का कहना है कि उनके ऊपर केसीसी का डेढ़ लाख का कर्ज बकाया है। वे रकम लौटाने की स्थिति में भी हैं। लेकिन, उनका कहना है कि चुनाव के दौरान अक्सर राजनीतिक दलों की ओर से कर्जमाफी की घोषणा कर दी जाती है। 2011 में उनका 35 हजार का कर्ज सरकार ने माफ किया था। इस बार भी विधानसभा चुनाव में ये स्थिति बनने पर उन्हें लाभ हो जाएगा। केवल ब्याज माफ होने से ही उन्हें बड़ा फायदा हो जाएगा। वरना चुनाव के बाद तो कर्ज अदा कर ही देंगे।
केस - 2
आठ माह में जमा नहीं की एक भी किस्त
झांसी। बड़ागांव में रहने वाले हरनारायण सड़क किनारे खोखे में जूते - चप्पल की दुकान खोले हुए हैं। आठ महीने पहले उन्होंने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत बैंक से 10 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जिसकी अदायगी उन्हें 12 मासिक किस्तों में करनी थी। नियमित अदायगी करने पर उन्हें बैंक से 20 हजार का कर्ज और हासिल हो जाता। लेकिन, हरनारायण इस मुगालते में हैं कि सरकार विधानसभा चुनाव के दौरान उनका कर्ज माफ कर देगी। अब उनकी ये आस पूरी हो पाएगी या नहीं, ये तो आना वाला वक्त बताएगा। फिलहाल, बैंक की रकम फंस कर रह गई है।
वित्तीय अनियमितता की बनी स्थिति
झांसी। बैंक ऑफ बड़ौदा के सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक निरंजन धुलेकर का कहना है कि राजनीतिक लाभ लेने के लिए कर्जमाफी की घोषणा कर दी जाती है। पूर्व में कई बार सरकारों की ओर से किसानों को कर्जमाफी का लाभ भी दिया जा चुका है। इसके अलावा अन्य सरकारी योजनाओं के बकायेदार भी ऋण माफी का लाभ उठा चुके हैं। इससे वित्तीय अनियमितता की स्थिति पैदा हो गई है। पैसा होने के बाद भी तमाम लोग कर्ज नहीं चुकाते हैं। जबकि, कर्ज माफ न होने पर उन्हें ज्यादा ब्याज के साथ रकम वापस करनी पड़ जाती है। किसानों को तो चार की जगह 13 प्रतिशत तक ब्याज अदा करना पड़ जाता है। तमाम लोग जिस काम के लिए कर्ज लेते हैं, उस पर खर्च नहीं करते। बल्कि, अपनी व्यक्तिगत जरूरतें पूरी करते हैं। इससे सरकार की योजना भी अपने मुकाम पर नहीं पहुंच पाती है।