संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। बृहस्पतिवार से आषाढ़ की गुप्त नवरात्र शुरू होगी। श्रद्धालु मां आदिशक्ति की आराधना करेंगे। देवी मंदिरों एवं आश्रमों में धार्मिक अनुष्ठान होंगे। वहीं, बुधवार को आषाढ़ की अमावस्या श्रद्धा से मनाई गई।
वर्ष में चार नवरात्र पड़ती है। माघ एवं आषाढ़ की नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। इसमें साधक 10 महाविद्याओं की उपासना करते हैं। देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। ज्योतिषविद रजनी दीक्षित के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुप्त नवरात्र शुरू होगी। प्रतिपदा पर ध्रुव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग एवं आद्रा नक्षत्र रहेगा। कलश स्थापना पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात: 5:25 बजे से 6:50 बजे तक, इसके बाद दोपहर 11:56 बजे से 12:52 बजे तक है। इधर, बुधवार को आषाढ़ अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने ओरछा एवं उनाव बालाजी धाम की पवित्र नदियों में स्नान कर दान किया। अपने आराध्य देव के दर्शन किए।